[ संजय गुप्त ]: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अर्से से यह जो संकल्प व्यक्त करते चले आ रहे हैैं कि भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनाना है, उसे ही आम बजट के जरिये पूरा करने का प्रयास वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करती दिखीं। चूंकि उनकी ओर से पेश बजट देश को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित है और इसे आगामी पांच वर्षों में हासिल किया जाना है इसलिए जो यह मानकर चल रहे थे कि इसी बजट से अर्थव्यवस्था को पंख लग जाएंगे वे नाउम्मीद दिख रहे हैं।

सरकार ने बजट में  दूरगामी लक्ष्य का संधान करना बेहतर समझा

यह स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें इसकी भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए कि सरकार ने दूरगामी लक्ष्य का संधान करना बेहतर समझा। इस लक्ष्य की दिशा में बढ़ने के साथ ही वित्त मंत्री ने कुछ तात्कालिक लक्ष्यों पर भी ध्यान दिया और उस मांग को पूरा किया जिसके तहत यह कहा जा रहा था कि नौैकरी-पेशा वर्ग को आयकर में छूट दी जानी चाहिए। इस मांग का एक बड़ा आधार कुछ समय पहले कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का फैसला था।

वित्त मंत्री ने दी सशर्त टैक्स राहत

वित्त मंत्री ने टैक्स राहत देने की मांग पूरी तो की, लेकिन उसमें कुछ शर्तें लगा दीं। ये शर्तें टैक्स देने वालों का असमंजस बढ़ा सकती हैं। बेहतर होता कि इस असमंजस के लिए गुंजाइश नहीं रखी जाती और आयकरदाताओं को जो राहत दी जानी चाहिए थी वह सीधे-सरल तरीके से दी जाती। अभी तो लोगों को यह देखना-समझना होगा कि वह किस विकल्प को चुने और कौन विकल्प उसके लिए फायदेमंद रहेगा? हालांकि टैक्स राहत के कदमों की घोषणा यह बता रही है कि आयकर दाताओं को ठीक-ठाक बचत होगी, जैसे कि 15 लाख सालाना आय वालों को करीब 75 हजार का लाभ मिलेगा। यह अपने आप में ठीक -ठीक रकम है, लेकिन देखना यह होगा कि यह कदम खपत बढ़ाने के सिलसिले को बढ़ाएगी या नहीं?

वित्तमंत्री का बेलगाम टैक्स अफसरों पर लगाम

बजट के जरिये वित्तमंत्री ने कारोबार जगत की यह शिकायत दूर करने का वायदा किया कि उसे टैक्स अफसरों की ओर से अनावश्यक परेशान न किया जाए। यह शिकायत दूर किया जाना आवश्यक था, क्योंकि यह माहौल बन रहा था कि टैक्स अधिकारी उद्योग-व्यापार जगत के लोगों को बेवजह परेशान कर रहे हैैं। इसे टैक्स टेरर की संज्ञा दी जा रही थी। बेहतर हो कि सरकार बेलगाम टैक्स अफसरों पर सचमुच अंकुश लगाए ताकि कोई भी कारोबारी अनावश्यक रूप से परेशान न हो।

वित्त मंत्री ने कहा- संपदा का निर्माण कोई हीन कर्म नहीं

बजट के जरिये वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संपदा का निर्माण कोई हीन कर्म नहीं है। नि:संदेह इसे स्पष्ट करने की जरूरत थी, क्योंकि बीते कुछ वर्षों में ऐसा वातावरण बना दिया गया है जैसे उद्योगपति अवांछित तत्व हैं और धन कमाना कोई बुरा काम है। आखिर कोई इसकी अनदेखी कैसे कर सकता है कि कुछ विपक्षी नेताओं ने उद्योगपतियों को बदनाम करने का अभियान छेड़ा? कहना कठिन है कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए उद्योगपतियों को लांछित करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी या नहीं, लेकिन सभी को यह समझने की जरूरत है कि उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करके ही गरीबी और अशिक्षा जैसी समस्याओं का सही तरह से समाधान किया जा सकता है।

उद्योग-धंधों का निर्माण करने वालों को सम्मान की दृष्टि से देखना अनिवार्य माना जाए

यह आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य है कि उद्योग-धंधों का निर्माण करने वालों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाए। इसी के साथ यह भी जरूरी है कि उद्यम के नाम पर छल-कपट करने वालों पर सख्ती की जाए। मोदी सरकार यह काम कर रही है और यह जारी रहना चाहिए।

बजट के जरिये लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगपतियों को राहत

यह अच्छा है कि आम बजट के जरिये लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगपतियों को राहत देने के कई उपाय किए गए हैं, लेकिन देखना यह होगा कि इन उपायों से इस श्रेणी के उद्योगपति वास्तव में उत्साहित हों और वे अपने उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय हों। इन उद्योगपतियों का मनोबल सचमुच बढ़े, इसे सरकार को प्राथमिकता के आधार पर देखना होगा। ऐसा माहौल बनाना समय की मांग है जिससे नए-नए उद्योग लगें और पुराने उद्योगों का विस्तार हो।

रोजगार की समस्या का समाधान निकलेगा

ध्यान रहे कि इससे ही रोजगार की उस समस्या का समाधान निकलेगा जो एक चुनौती बन रही है। आम बजट यह दर्शा रहा है कि सरकार आर्थिक सुस्ती को दूर करने के साथ ही आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। ध्यान रहे कि सरकार की ओर से यह घोषणा पहले ही की जा चुकी है कि अगले पांच सालों में सौ लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बेहतर हो कि यह धनराशि इस तरह खर्च की जाए जिससे अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र समान रूप से लाभान्वित हों।

कृषि क्षेत्र का उत्थान समय की मांग

कृषि क्षेत्र का उत्थान समय की मांग है। कृषि का उत्थान सरकार की प्राथमिकता में बने ही रहना चाहिए। किसानों की हालत में सुधार के अपने वायदे पर सरकार को खरा उतरना होगा। इसी के साथ सरकार को इस पर भी ध्यान देना होगा कि विदेशी निवेशक भारत को पसंदीदा ठिकाना मानते रहें।

विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए डिवीडेंट टैक्स को समाप्त करने की घोषणा स्वागतयोग्य

विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए डिवीडेंट टैक्स को समाप्त करने की घोषणा स्वागतयोग्य है। सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि विदेशी निवेश बुनियादी ढांचा विकसित करने और बेहतर बनाने का भी काम करे। चूंकि मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल में सामाजिक सुधार की तमाम योजनाएं शुरू कर चुकी हैं इसलिए इस बजट में ऐसी योजनाओं के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। सामाजिक योजनाओं का क्रियान्वयन राज्यों के हिस्से में है और यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि राज्य सरकारें इन योजनाओं को लागू करने में हीला-हवाली कर रही हैं। चूंकि इन योजनाओं के लिए ठीक-ठाक धन आवंटित किया गया है इसलिए राज्यों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार पर सरकार को सतर्क रहना होगा

भारत जैसे विशाल देश में गवर्नेंस अपने आपमें एक बड़ा मामला है। यह अच्छा है कि सरकार गवर्नेंस को बेहतर बनाने के लिए संचार तकनीक के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर निवेश कर रही है। ऐसा किया जाना समय की मांग है। चूंकि इस समय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था भारत को प्रभावित कर रही है इसलिए सरकार को सतर्क रहना होगा।

चीन में कोरोना वायरस वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा

चीन में संकट बनकर उभरा कोरोना वायरस मानव स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक चुनौती बन रहा है। सरकार को ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे चीन का यह संकट भारत को प्रभावित न करने पाए।

बजट ने शेयर बाजार को उत्साहित नहीं किया

नि:संदेह बजट ने शेयर बाजार को उत्साहित नहीं किया, लेकिन बजट को केवल उसकी निगाह से देखना सही नहीं होगा, फिर भी सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि कारोबार जगत को उससे अभी भी तमाम उम्मीदें हैं। उसे यह भरोसा दिलाना चाहिए कि वह इन उम्मीदों को पूरा करने के लिए तैयार है और इसके लिए बजट की मोहताज नहीं है।

[ लेखक दैनिक जागरण के प्रधान संपादक हैं ]

Posted By: Bhupendra Singh

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