कभी पढ़ाई की टेंशन होती है तो कभी फ्रेंड्स या फैमिली के साथ कोई मतभेद इन सब बातों का नेगेटिव असर जाने-अनजाने हमारी पूरी पर्सनैलिटी पर पड़ने लगता है।

क्या है मेंटल स्ट्रेस
किसी भी तरह का स्ट्रेस, जिससे लाइफस्टाइल प्रभावित होने लगे, मेंटल स्ट्रेस कहलाता है। जब किसी टेंशन का असर हमसे जुड़े लोगों पर भी पडऩे लगे, तब समस्या की गंभीरता का अंदाज़ा लगा लेना चाहिए।

लक्षणों से न हों अनजान
कुछ लोग अपनी परेशानियां किसी के साथ जल्दी बांट नहीं पाते। अकसर ऐसे लोग ही मेंटल स्ट्रेस से जूझते हैं। जानें इसके लक्षण।
- नींद न आना या बहुत ज़्यादा आना
- अचानक से वज़न घटना या बढ़ना
- स्किन डिज़ीज़ होना
- सेक्स में अरुचि होना
- पेट या सिर में दर्द होना
- अपच की शिकायत होना
- भूलने की समस्या होना
- मूड स्विंग्स होना

हर पल है जीना यहां
तनाव की स्थिति कोई जानबूझकर नहीं बनाता है, बल्कि अनजाने में उसका शिकार हो जाता है। जीवन के हर मोड़ पर कुछ ऐसी स्थितियां आती हैं, जब व्यक्ति खुद को कमज़ोर, थका हुआ या अकेला पाने लगता है। कुछ बातों को जीवन का मूल उद्देश्य बनाकर इन स्थितियों में भी हंसा-मुस्कुराया जा सकता है।
- गुस्से पर नियंत्रण रखना सीखें
- दोस्तों के साथ वक्त बिताएं, बातें शेयर करें
- हमेशा जजमेंटल न बनें
- दिनचर्या में बदलाव लाते रहें
- सुनने की भी आदत डालें
- अपने गुणों को पहचानें
- जि़म्‍मेदारी लेना सीखें
- सॉरी व थैंक यू कहने के बहाने ढूंढें
- भावनाओं को प्रदर्शित करें

खेल-खेल में बदलें हम
खेल हमारे जीवन में बहुत महत्व रखते हैं, खासकर वे, जिनमें दूसरों की भागीदारी हो। ये टेंशन तो दूर भगाते ही हैं, अपनों के साथ समय बिताने का मौका भी देते हैं।
- बोर्ड गेम्‍स, जैसे कि कैरम, लूडो या चेस
- नेम, प्लेस, एनिमल, थिंग- इसमें किसी एक अक्षर से प्लेयर को एक व्यक्ति का नाम, एक जगह, एक जानवर और एक चीज़ का नाम लिखना होता है।
- अंताक्षरी या किसी तरह की प्रतियोगिता
- क्रिकेट, बास्केट बॉल, रनिंग जैसे आउटडोर गेम्‍स
समय का चक्र चलता रहता है, सुख-दुख के पल उसी का हिस्सा हैं। वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता है, इसलिए जि़ंदगी के हर पल को खुशी के साथ जीने की आदत डालनी चाहिए।

दीपाली पोरवाल

Posted By: Pratibha Kumari