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दिल्ली में यमुना किनारे की सब्जियों में भारी धातुएं, कैंसर का बढ़ा खतरा; DU के अध्ययन में बड़ा खुलासा

Published: Thu, 24 Sep 2026 05:41 AM (IST)

यमुना के प्रदूषित पानी से उगाई जा रही सब्जियों में भारी धातुओं का चिंताजनक स्तर पाया गया है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गैर-कैंसरकारी और कैंसरकारी जोखिम हो सकता है।

यमुना किनारे उपजाई जानेवाली सब्जियों में कैंसरकारी तत्व।

यमुना किनारे उपजाई जानेवाली सब्जियों में कैंसरकारी तत्व।

HighLights

  1. यमुना किनारे की सब्जियों में भारी धातुओं का उच्च स्तर।

  2. प्याज में निकेल 65 गुना, पालक में 97 गुना अधिक।

  3. सब्जियों के सेवन से कैंसरकारी जोखिम की आशंका।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। यमुना के प्रदूषित पानी से उगाई जा रही सब्जियां अब सिर्फ नदी के प्रदूषण की कहानी नहीं रह गई हैं, बल्कि लोगों की थाली तक पहुंचकर स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। एनर्जी नेक्सस में प्रकाशित एक अध्ययन में यमुना किनारे के कृषि क्षेत्रों की मिट्टी और वहां उगाई जाने वाली सब्जियों में भारी धातुओं का चिंताजनक स्तर पाया गया है। शोध में सब्जियों के सेवन से गैर-कैंसरकारी स्वास्थ्य जोखिम के साथ कैंसरकारी जोखिम की भी आशंका जताई गई है।

डीयू के अध्ययन के मुताबिक, बिना उपचार किए गए अपशिष्ट जल से सिंचाई के कारण मोलिब्डेनम, एल्युमिनियम, जिंक, निकेल, क्रोमियम, कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुएं कृषि मिट्टी में पहुंच रही हैं। पौधों की जड़ों द्वारा इन धातुओं के अवशोषण के कारण कई सब्जियों में इनका जैव-संचयन भी पाया गया।

प्याज में निकेल 65 गुना, पालक में 97 गुना अधिक

शोधकर्ताओं ने विभिन्न सामान्य सब्जियों की जांच की। इसमें प्याज में निकेल का स्तर निर्धारित सीमा से 65 गुना और पालक में 97 गुना अधिक पाया गया। वहीं सफेद मूली में क्रोमियम 11 गुना, पालक में 12 गुना और सरसों में 22 गुना अधिक दर्ज किया गया।

लाल मूली में मोलिब्डेनम 340.06 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और क्रोमियम 36.58 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक पाया गया। मेथी में जिंक का स्तर 177.72 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम रहा। धनिया में निकेल 19.91 और कैडमियम 1.59 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाया गया। सरसों में सीसे का स्तर 5.86 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया गया।

कैंसरकारी जोखिम भी सामने आया

अध्ययन में सब्जियों के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम का आकलन किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, हजार्ड इंडेक्स सुरक्षित सीमा से काफी अधिक रहा। वहीं कैंसर होने का कुल जोखिम भी कई सब्जियों में चिंता का विषय पाया गया। लाल मूली में यह 0.17, धनिया में 0.16 तथा पालक और सफेद मूली में 0.14 दर्ज किया गया। शोधकर्ताओं ने इसमें मुख्य रूप से निकेल और क्रोमियम के योगदान की बात कही है।

शोध का नेतृत्व डीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. दिनबंधु साहू ने किया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी और फसलों की लगातार सरकारी निगरानी जरूरी है। साथ ही नदी में प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर नियंत्रण और किसानों को कम भारी धातु जमा करने वाली फसलों की ओर स्थानांतरित करने की जरूरत है।

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