नई दिल्ली [गौतम मिश्रा]। अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबीता फोगाट रविवार को अपने पैतृक गांव बलाली में पहलवान विवेक सुहाग के साथ परिणय सूत्र में बंध गईं। नवदंपती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ आठवां फेरा लिया। उन्होंने एक-एक पौधा लगाकर पर्यावरण को बचाने का आह्वान किया।

रविवार को करीब साढ़े तीन बजे विवेक की घुड़चढ़ी की रस्म अदा की गई। इस दौरान विवेक की बहन नम्रता, मौसी सुदेश, ताऊ ओमप्रकाश सहित तमाम रिश्तेदार नाचते-गाते नजर आए। घोड़ी पर विवेक के साथ इनके भांजे अंश मोर बैठे थे। घुड़चढ़ी के बाद बाराती छह कारों के काफिले के साथ हरियाणा के दादरी स्थित बलाली गांव के लिए रवाना हुए। 

देसी खाने का था मेन्यू

शादी में पहलवानों के लिए फोगाट परिवार ने देसी खाने का मेन्यू तैयार करवाया गया। मेन्यू में ¨सैंपल रोटी, केसर की खीर तैयार की गई थी। इसके अलावा मिस्सी रोटी, मक्खन, लस्सी, गाजर का हलवा, जूस, रायता, सलाद और गुड़ शामिल था।

फिजूलखर्ची से बचने की दी सीख

बबीता के पिता द्रोणाचार्य अवार्डी महाबीर फोगाट ने बताया कि शादी का आयोजन सादगी और फिजूलखर्ची न हो इसका ध्यान रखते हुए किया गया है। विवेक सुहाग ने भी इसका समर्थन किया। बताया कि शादी में उनके निजी रिश्तेदार व परिवार के 21 बराती आए हैं। दहेज का तो सवाल ही नहीं उठता।

दो दिसंबर को रिसेप्शन का आयोजन

बबीता और विवेक की शाद के बाद सोमवार को रिसेप्शन  होगा। रिसेप्शन में जिन लोगों को आमंत्रण भेजा गया है उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, फिल्म अभिनेता आमिर खान सहित अनेक शख्सियत के नाम शामिल हैं। 

पहली मुलाकात में पसंद आ गई थीं बबीता

अंतरराष्ट्रीय पहलवान व दंगल गर्ल बबीता फौगाट की विवेक सुहाग से पहली मुलाकात सोनीपत स्थित साईं सेंटर में कुश्ती खिलाड़ियों के लिए लगे एक राष्ट्रीय शिविर के दौरान वर्ष 2014 में हुई थी। विवेक बताते हैं कि पहली मुलाकात में ही उन्हें बबीता की सादगी बहुत पसंद आई। वे हर बात में सुलझी व सरल हैं। सोनीपत स्थित साईं सेंटर में हुई मुलाकात के बाद हम दोनों में अक्सर बातें होने लगी। 2015 में हम दोनों ने शादी का फैसला किया।

विवेक दो भाई-बहन में छोटे हैं। विवेक वर्ष 2018 में भारत केसरी का खिताब जीत चुके हैं। सरल स्वभाव के विवेक व इनका परिवार भी बबीता की तरह ही सादगी को बेहद पसंद करता हैं। आज के दौर में जब बारातियों की तादाद सौ से ऊपर होनी सामान्य बात है, विवेक के परिवार ने 21 बारातियों को लेकर जाना तय किया। तमाम रस्म के बीच न तो बैंड बाजे का शोर न ही कोई तामझाम। घर की सजावट भी बिल्कुल साधारण नजर आई।

इनके पिता जय सिंह पहलवान सेना से सेवानिवृत्त हैं और मां नरेश गृहिणी हैं। विवेक की बहन सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। जय सिंह करीब दो दशक से नजफगढ़ में रह रहे हैं। ये मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिला स्थित मातनहेल गांव के रहने वाले हैं।

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Posted By: Mangal Yadav

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