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प्रधानमंत्री मोदी के आपत्तिजनक वीडियो मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, विनोद तिवारी को मिली सशर्त जमानत

Published: Tue, 17 Mar 2026 10:15 PM (IST)

विनोद तिवारी को प्रधानमंत्री मोदी के आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने के आरोप में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सशर्त ...और पढ़ें

विनोद तिवारी को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है। फाइल फोटो

विनोद तिवारी को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है। फाइल फोटो

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने के आरोपी को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपित ट्रिपल टेस्ट यानि फरार होने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने पर खरा उतरता है।

विनोद तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई 

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने आरोपित विनोद तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एफआइआर दर्ज की थी। आरोपित 14 मार्च से न्यायिक हिरासत में था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए जा चुके हैं और फिलहाल आगे की कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। साथ ही, आरोपों में अधिकतम सजा तीन साल तक है और ट्रायल में समय लग सकता है।

आरोपित को रिहा करने का आदेश

अदालत ने आरोपित को सशर्त जमानत देते हुए आरोपित को रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने सख्त शर्तें भी लगाईं, जिनमें देश छोड़कर न जाना, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करना, गवाहों को प्रभावित न करना, जांच में सहयोग करना और अपना मोबाइल नंबर हमेशा सक्रिय रखना शामिल है।

अभियोजन के अनुसार, मोहम्मद अब्दुल्ला की शिकायत पर दर्ज एफआइआर में आरोप है कि विनोद तिवारी नाम से चल रहे फेसबुक अकाउंट से एआइ-जनित और मार्फ्ड वीडियो साझा किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री को आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। इससे सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई गई।

जांच एजेंसी ने बताया कि आरोपित ने वीडियो डाउनलोड कर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया। पुलिस के मुताबिक इस मामले में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। अन्य लोगों की संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।

मामले में आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336 (मानहानि के इरादे से जालसाजी), 356 (आपराधिक मानहानि) और 353 (लोक शांति भंग करने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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