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दिल्ली के विजय विहार में DDA के जर्जर फ्लैटों में रहने को मजबूर 5000 लोग, आए दिन हो रहे छत गिरने के हादसे

Published: Mon, 30 Mar 2026 11:07 PM (IST)

बाहरी दिल्ली के विजय विहार में लगभग पांच हजार लोग जर्जर फ्लैटों में जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। ...और पढ़ें

विजय विहार के खंडहर फ्लैटों की दीवारों में उगते अनावश्यक पेड़-पौधे व गंदगी। जागरण

विजय विहार के खंडहर फ्लैटों की दीवारों में उगते अनावश्यक पेड़-पौधे व गंदगी। जागरण

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जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। विजय विहार के खंडहर पड़े फ्लैटों में रहने वाले लगभग पांच हजार लोगों पर खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2002 में पहाड़गंज के झुग्गियों में रहने वाले गरीब लोगों की इन फ्लैटों में बसाया गया। उसके बाद इन फ्लैटों को सुध लेने वाला कोई नहीं है। इस कारण लोग पल-पल डर के साए में जीने को मजबूर हैं।

छत के हिस्से बदहाली को बयां कर रहे

दिल्ली विकास प्राधिकरण ने लगभग दो हजार फ्लैट बनाए थे। इनमें से तकरीबन 14 सौ फ्लैट झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को उपलब्ध कराए गए। जो अब इन जर्जर फ्लैटों में रहने को मजबूर हैं। बाकी के छह सौ फ्लैट सरकारी कर्मचारियों को आवंटित किए गए थे। लेकिन इन फ्लैटों की खस्ता हालत को देखते हुए सरकारी कर्मचारी इन्हें खाली कर चले गए। जो अब बंद पड़े हैं। दीवारों में आती दरारें, छतों से निकलता सरिया और विभिन्न जगहों पर टूटे हुए छत के हिस्से बदहाली को बयां कर रहे हैं।

कई लोगों के साथ हो चुके हैं हादसे

फ्लैटों के निर्माण के बाद इनकी मरम्मत ही नहीं की गई। रखरखाव के अभाव कारण फ्लैट पूरी तरह से खंडहर बन चुके है। मलबा गिरने के कारण कई लोगों के साथ हादसे भी हो चुके है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन संज्ञान लेने को तैयार नहीं। प्रधान चरणदास ने बताया कि मैं सरकार व प्रशासन के लोगों स्थिति से अवगत के करा चुका हूं। लेकिन आज तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया। ऐसे में कभी कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

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चार-पांच दिनों पहले गिरा छत का हिस्सा। जागरण 

गंदगी से बीमारियों की आशंका

विजय विहार के फ्लैटों में नियमित साफ- सफाई न होने के कारण बीमारियों की आशंका भी बनी हुई है। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर लोगों के लिए आफत बने हुए है। नालियों की सफाई न होने के कारण पानी का निकास नहीं है और कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति भी देखने को मिलती है। लोगों का कहना है कि यहां बदबू और मच्छरों की वजह से रहना मुश्किल हो चुका है। लेकिन मजबूरी में रहना पड़ रहा है।

पहाड़गंज की झुग्गियों से लाकर हमें इन फ्लैटों में बसाया गया। लेकिन कभी भी इनकी मरम्मत या रखरखाव ही नहीं किया गया। जिसके कारण यह खंडहर हो चुके है और हमारी आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं है कि हम किसी दूसरी जगह पर जाकर रह सकें। इसलिए मजबूरन यहां जान को जोखिम में डालकर रह रहे है।

-विक्की, स्थानीय निवासी

चार-पांच दिनों पहले में शौचालय गया और अचानक से छत का हिस्सा मेरे ऊपर ही गिर गया। गनीमत रही कि मैं बच गया। लेकिन मेरे हाथ, सिर और छाती में चोट आई है। इस तरह के हादसे यहां होते रहते हैं।

-राजीव, घायल

नियमित रूप से सफाई न होने की वजह से यहां गंदगी और कूड़े का ढेर लगा रहता है। पानी का कोई निकास ही नहीं है। इस कारण कई जगहों पर जलजमाव भी हो जाता है। ऐसे में बदबू और मच्छरों के कारण बीमारियों की आशंका भी बनी हुई है।

-अमन, स्थानीय निवासी

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