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दिल्ली में सजी उत्तम कुमार की सिनेमाई दुनिया, दुर्लभ पोस्टरों में दिखी महानायक के सुनहरे दौर की झलकें

Published: Sat, 19 Sep 2026 07:08 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 07:11 PM (IST)

दिल्ली में 'सिनेमा ऑफ उत्तम कुमार' प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जहाँ बंगाली सिनेमा के 'महानायक' उत्तम कुमार के ...और पढ़ें

इस संग्रह को लेकर आए हैं जीके-2 के रहने वाले 69 वर्षीय बाबी कोहली। बचपन से ही दुर्लभ और पुरानी चीजों को सहेजते हैं। फिल्मों के अलावा वह दुर्लभ कैसेट्स, घड़ियों, हेलेन व राज कपूर जैसे कलाकारों पर भी प्रदर्शनियां लगा चुके हैं।

इस संग्रह को लेकर आए हैं जीके-2 के रहने वाले 69 वर्षीय बाबी कोहली। बचपन से ही दुर्लभ और पुरानी चीजों को सहेजते हैं। फिल्मों के अलावा वह दुर्लभ कैसेट्स, घड़ियों, हेलेन व राज कपूर जैसे कलाकारों पर भी प्रदर्शनियां लगा चुके हैं।

HighLights

  1. उत्तम कुमार के जन्म शताब्दी वर्ष पर प्रदर्शनी।

  2. दुर्लभ फिल्म पोस्टर और सिनेमाई स्मृतियों का संग्रह।

  3. प्रदर्शनी 25 सितंबर तक निःशुल्क उपलब्ध।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पुराने फिल्म पोस्टरों के रंग भले ही कुछ फीके पड़ गए हों, लेकिन उनमें दर्ज चेहरा आज भी उतना ही चमकदार है। कहीं रोमांटिक नायक की मुस्कान है तो कहीं गंभीर किरदार की गहरी आंखें। ये पोस्टर सिर्फ फिल्मों की याद नहीं दिलाते, बल्कि बंगाली सिनेमा के उस दौर को सामने लाते हैं, जब उत्तम कुमार का नाम पर्दे पर आते ही दर्शक उत्साहित हो जाते थे।

बंगाली सिनेमा के ‘महानायक’ उत्तम कुमार के जन्म शताब्दी वर्ष पर दिल्ली में उनके सिनेमाई सफर की बेहतरीन यादें सजी हैं। ‘सिनेमा ऑफ उत्तम कुमार’ नाम से लगी प्रदर्शनी में फिल्म पोस्टर, लाबी कार्ड, गीतों के सिनाप्सिस और दुर्लभ सिनेमा स्मृतियों का संग्रह दर्शकों को उत्तम कुमार के दौर में ले जाते हैं।

इस संग्रह में अगस्त 1955 में रिलीज हुई चर्चित बंगाली ब्लैक एंड व्हाइट ड्रामा फिल्म ‘कंकाबतीर घाट’, 1957 में आई रंगीन ब्लाकबस्टर ‘पथे होलो देरी’ और 1975 में बनी बंगाली-हिंदी फिल्म ‘अमानुष’ के पोस्टर भी शामिल हैं। इन पोस्टरों से फिल्म प्रचार की झलक भी मिलती है।

  • कहां: द सेंटर ऑफ आर्ट, जीके-2
  • क्या: प्रदर्शनी-सिनेमा आफ उत्तम कुमार
  • कब: 25 सितंबर तक
  • प्रवेश: निश्शुल्क

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