वजीराबाद यमुना पुल के पास स्नान करने उतरीं दो युवतियों की डूबने से मौत, जितिया व्रत से पहले यमुना में हादसा
जितिया पर्व से पहले यमुना में स्नान करते समय दो युवतियों की डूबने से मौत हो गई। यह हादसा वजीराबाद ...और पढ़ें

सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे गोताखोरों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
जितिया पर्व से पूर्व यमुना में स्नान करते समय हादसा।
वजीराबाद यमुना पुल के पास सुर घाट पर दो युवतियां डूबीं।
घाट पर सुरक्षा इंतजामों की कमी पर उठे गंभीर सवाल।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जितिया (जीवित्पुत्रिका) पर्व से पूर्व यमुना स्नान के लिए सुर घाट पहुंचीं दो युवतियों की शुक्रवार सुबह डूबने से मौत हो गई। वजीराबाद यमुना पुल के पास हुए हादसे में दोनों युवतियां स्नान करते समय यमुना के गहरे पानी में चली गईं। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे गोताखोरों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
जखीरा की रहने वाली थीं दोनों महिला
मृतकों की पहचान जखीरा की काजल कुमारी और पिंकी कुमारी के रूप में हुई है। दोनों अपने स्वजन के साथ जितिया पर्व से पूर्व यमुना स्नान के लिए सुर घाट पहुंची थीं। तिमारपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
उत्तरी जिले की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह जितिया पर्व के उपलक्ष्य में सुर घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान स्नान करते समय काजल और पिंकी यमुना के गहरे हिस्से में चली गईं और डूबने लगीं। दोनों को पानी में डूबता देखकर घाट पर मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई।
गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद तलाशा
लोगों ने शोर मचाकर मदद की सूचना दी। इसके बाद गोताखोरों ने यमुना में तलाशी अभियान शुरू किया। कुछ देर की मशक्कत के बाद दोनों युवतियों को पानी से बाहर निकाला, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
स्वजन ने लगाया आरोप, नहीं थे पर्याप्त इंतजाम
जितिया जैसे पर्व पर यमुना घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद सुर घाट पर सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों के स्वजन का आरोप है कि घाट पर श्रद्धालुओं को गहरे पानी की ओर जाने से रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।
उनका कहना है कि यदि बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी होती तो हादसा टल सकता था। हादसे के बाद घाट पर गहरे पानी वाले स्थानों की पहचान, बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त संख्या में गोताखोरों की तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
