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तरुण हत्याकांड: डॉ. पंकज नारंग की हत्या की दर्दनाक यादें ताजा, दिल्ली में सुरक्षा पर सवाल

Published: Tue, 10 Mar 2026 05:11 AM (IST)

तरुण हत्याकांड ने लोगों को 2016 में विकासपुरी में डॉ. पंकज नारंग की होली के दिन हुई निर्मम हत्या की ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड

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HighLights

  1. तरुण हत्याकांड ने डॉ. नारंग की हत्या की यादें ताजा कीं।

  2. दोनों मामलों में मामूली विवाद के बाद हमलावरों ने कानून तोड़ा।

  3. दिल्ली में सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर चिंता बढ़ी।

गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। उत्तम नगर के तरुण हत्याकांड ने एक दशक पूर्व विकासपुरी में डॉ. पंकज नारंग की हत्या से जुड़ी यादें क्षेत्र के लोगों के मन में ताजा कर दी है। लोगों का कहना है कि दोनों घटनाओं में व्याप्त समानताएं लोगों के मन में कायम जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।

होली के दिन ही हुई थी अंकुश नारंग की पीट पीटकर हत्या

वर्ष 2016 में होली के दिन ही पेशे से दंत चिकित्सक डा पंकज नारंग की उनके घर के बाहर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना तब हुई थी, जब डॉ. पंकज नारंग अपने घर के बाहर अपने बेटे के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान दो युवक वहां से गुजरे। यहां किसी बात पर एक सामान्य बहस हुई, जो कुछ ही पलों में खत्म हो गई थी और युवक वहां से चले गए थे।

वहीं, विवाद खत्म होने के कुछ ही देर बाद, वे युवक अपने साथ 10-12 अन्य लोगों को लेकर वापस आए। उनके हाथों में डंडे, लोहे की राड और क्रिकेट बैट थे। उन्होंने डा. नारंग को उनके घर से खींच लिया और उनके परिवार (पत्नी और बेटे) के सामने ही उन्हें बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

बताया गया कि डॉ. नारंग को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

लोगों का कहना है कि तरुण और डॉ. पंकज नारंग, दोनों ही मामलों में हमलावरों ने मामूली विवाद या बिना किसी बड़े कारण के जिस तरह से कानून को हाथ में लिया, वह एक जैसे पैटर्न को दर्शाता है। डॉ. नारंग पर उनके घर के सामने हमला हुआ था, और तरुण के मामले में भी हमलावरों ने सरेआम दहशत फैलाई। दोनों ही पीड़ित अपने क्षेत्र में सम्मानित थे और उनकी किसी से कोई पुरानी रंजिश नहीं थी।

आज भी लोगों के लिए एक गहरा घाव 

विकासपुरी निवासी अमित त्यागी बताते हैं कि डॉ. पंकज नारंग का मामला आज भी लोगों के लिए एक गहरा घाव है, और तरुण हत्याकांड ने उस घाव को फिर से हरा कर दिया है। प्रशासन को यह समझना होगा कि केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि समाज में सुरक्षा का वह माहौल पैदा करना होगा जो इन दोनों ही मामलों में गायब दिखा।

अमित कहते हैं कि सबसे बड़ा सवाल है कि क्या एक आम इंसान अपने ही मोहल्ले में सुरक्षित नहीं है। क्या अपराधियों के मन से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।

विकासपुरी निवासी रवि बताते हैं कि तरुण के साथ जो हुआ, वह महज एक अपराध नहीं है, बल्कि यह एक खास पैटर्न है।