जंतर-मंतर मारपीट केस: 'शिकायतकर्ता ने किया था मुझ पर हमला', स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत पर सुनवाई पूरी
स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है, जिसमें उनके अधिवक्ता ने गिरफ्तारी ...और पढ़ें

स्वतंत्र भारद्वाज। सौ- सोशल मीडिया
HighLights
स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई पूरी।
अधिवक्ता ने गिरफ्तारी को राजनीतिक बताया, शिकायतकर्ता पर हमला करने का आरोप।
अदालत ने दिल्ली पुलिस से जातिसूचक टिप्पणी के आरोपों पर सवाल किए।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सीजेपी के नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता से जंतर-मंतर पर जुलाई में मारपीट के मामले में आरोपित स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई पूरी कर फैसला मंगलवार के लिए टाल दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर मंगलवार को फैसला सुनाएंगे।
सुनवाई के दौरान भारद्वाज के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी कुछ राजनीतिक घटनाक्रम के बाद की गई। अधिवक्ता ने दावा किया कि जून में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान शिकायतकर्ता ने ही भारद्वाज पर हमला किया था।
उन्होंने अदालत में संबंधित वीडियो भी दिखाया। अदालत ने वीडियो क्लिप चलाकर देखी।
जातिसूचक टिप्पणी को लेकर पुलिस से सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या घटना के समय भारद्वाज ने कोई जातिसूचक टिप्पणी की थी। पुलिस ने बताया कि शुरुआत में दर्ज शिकायत में जातिसूचक टिप्पणी का कोई उल्लेख नहीं था। बाद में दोबारा बयान दर्ज किए जाने पर जातिसूचक टिप्पणी का जिक्र किया गया, जिसके बाद एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं।
भारद्वाज के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके खिलाफ 23 जून को एफआइआर दर्ज हुई थी और 27 जून को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया था। वह 29 जून को पूछताछ में शामिल हुए और उसके बाद उन्हें जाने दिया गया।
अधिवक्ता के मुताबिक, इसके बाद चार सितंबर को उन्हें गिरफ्तार किया गया और गिरफ्तारी के बाद पाक्सो अधिनियम के तहत एक नई एफआइआर दर्ज की गई।
इन-कैमरा हुई कार्यवाही
शिकायतकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने गिरफ्तारी को पूरी तरह कानूनी बताते हुए कहा कि आरोपित के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम और पाक्सो अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में एफआइआर दर्ज हैं। इसके बाद अदालत ने कार्यवाही इन-कैमरा करने का निर्देश दिया और कोर्ट स्टाफ ने मीडिया कर्मियों को अदालत कक्ष से बाहर जाने को कहा।
भारद्वाज को चार सितंबर को बुलंदशहर में हिरासत में लिया गया था। इससे कुछ घंटे पहले सीजेपी ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी।
यह कार्रवाई एक इंटरव्यू के बाद हुए विवाद के बीच हुई थी, जिसमें भारद्वाज ने दावा किया था कि 23 जून के प्रदर्शन के दौरान उन्होंने छात्र कार्यकर्ता के पिता की खोपड़ी फोड़ दी थी और राजनीतिक संबंधों के कारण गिरफ्तारी से बच गए थे।
