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सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस देने में बड़ा एक्शन, Greater Noida एसीपी डॉ रवि शंकर मिश्रा निलंबित

Published: Thu, 10 Sep 2026 07:03 PM (IST)

CJP Protest: डीजीपी राजीव कृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर छात्र को नोटिस जारी करने के मामले की जांच का निर्देश दिया है।

एसीपी (कार्यपालक मजिस्ट्रेट ग्रेटर नोएडा तृतीय) डॉ रवि शंकर मिश्रा

एसीपी (कार्यपालक मजिस्ट्रेट ग्रेटर नोएडा तृतीय) डॉ रवि शंकर मिश्रा

HighLights

  1. उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

  2. मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस भी फंसी, एसआइ की रिपोर्ट पर जारी किया था नोटिस

  3. डीजीपी राजीव कृष्ण ने दिया मामले की जांच का निर्देश

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। दिल्ली के जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट के मना करने के बाद भी नोटिस जारी करने के मामले में बड़ा एक्शन हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस एक्शन से सुप्रीम कोर्ट को भी अवगत करा दिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के मना करने के बाद भी छात्र अक्षत त्रिपाठी नोटिस जारी करने के मामले में एसीपी (कार्यपालक मजिस्ट्रेट ग्रेटर नोएडा तृतीय) डॉ रवि शंकर मिश्रा को निलंबित कर दिया है। इस मामले में नोएडा पुलिस भी फंस गई है।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर छात्र को नोटिस जारी करने के मामले की जांच का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जंतर-मंतर पर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन में शामिल किसी भी युवा पर कार्रवाई न की जाए। इसके बाद भी छात्र को किस आधार पर नोटिस जारी किया गया, इसकी जांच पूरी कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

सीजेपी ने पेपर लीक मामले को लेकर 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में देश भर से हजारों युवाओं ने भाग लिया था। सरकार के साथ बातचीत के बाद सीजेपी ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया था। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों में कार्रवाई की जा रही है।

इसी सिलसिले में पिछली चार सितंबर को एसीपी (कार्यपालक मजिस्ट्रेट-तृतीय) ग्रेटर नोएडा डॉ रवि शंकर मिश्रा ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र व झांसी निवासी अक्षत त्रिपाठी को शांति भंग करने सहित विभिन्न मामलों को लेकर पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस भेज दिया था। इसके विरोध में सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने जिला प्रशासन पर सवाल उठाए ।

नोटिस पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारों के तहत जारी किया गया था। जिन शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था है, वहां पर इस प्रकार के मामलों में कार्रवाई का अधिकार जिलाधिकारी की बजाय पुलिस कमिश्नर के पास होता है। सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए पुलिस ने चार सितंबर को जारी नोटिस पांच सितंबर को वापस ले लिया था। फिलहाल छात्र को गलत नोटिस जारी कर फंसी पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

एसआई की रिपोर्ट पर जारी किया नोटिस

कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने प्रदर्शनकारी छात्र को थाना इको-प्रथम के उप निरीक्षक (एसआइ) शिवा पांडेय की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया है। थाना प्रभारी को भेजी गई जांच रिपोर्ट में एसआइ ने लिखा है कि संबंधित छात्र अपने साथ विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को धरने में लेकर पहुंचा था। इस दौरान सरकार के विरोध में भ्रामक बातों को फैला कर बाकी छात्रों को उकसाया जा रहा था, जिससे अशांति भंग की संभावना बनी थी। इस रपोर्ट को कार्यपालक मजिस्ट्रेट को भेजा गया था, जिसके आधार पर छात्र को नोटिस जारी किया गया था।

पुलिस कमिश्नरेट के अधिकार

उत्तर प्रदेश में कमिश्नरेट के पास यह अधिकार हैं कि गैग्सटर एक्ट, गुंडा एक्ट, शांति भंग, उपद्रव की आशंका में किसी को भी पाबंद करने, जमीन को कब्जा मुक्त कराने और अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन को कुर्क करने के अधिकार पुलिस कमिश्नरेट के पास होते हैं। इन्हीं अधिकारों के तहत गौतमबुद्धनगर के एसीपी (कार्यपालक मजिस्ट्रेट-तृतीय) ने जीबीयू के छात्र को पांच लाख रुपये की पंबादी मुचलके का नोटिस जारी किया था। नोटिस में खामी यह थी कि सुप्रीम कोर्ट पहली सितंबर को ही आदेश कर चुका था कि जंतर-मंतर के किसी भी प्रदर्शनकारी पर कार्रवाई न की जाए, जबकि नोटिस चार सितंबर को जारी किया गया था।

डीएम के पास हैं यह अधिकार

जिन शहरों में पुलिस कमिश्नरेट की व्यवस्था नहीं है वहां गैंग्सटर एक्ट लगाने, गुंडा एक्ट लगाने, धरना- प्रदर्शन की अनुमति देने, किसी भी व्यक्ति से शांति भंग होने की आशंका में पाबंद करने। निरोधात्मक कार्रवाई करने के सारे अधिकारी जिलाधिकारी के पास होते हैं। उनके साथ अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम), उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को भी अधिकार हस्तांतरित किए जा सकते हैं।

डॉ. रवि शंकर मिश्रा 2018 बैच के पीपीएस अफसर

डॉ. रवि शंकर मिश्रा PPS 2018 बैच के अफसर हैं, जिनकी भर्ती 31 मई 2021 को हुई थी और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के हैं। Ph.D की शैक्षणिक योग्यता हासिल की है और वर्तमान में पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्ध नगर में ACP/एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (तृतीय) के रूप में तैनात हैं।

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