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'वकीलों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल होने का अधिकार', गिरफ्तारी और पुलिस की बर्बरता सुनवाई करेगा SC

Published: Mon, 12 Oct 2026 11:42 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वकीलों को निर्धारित स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार है। कोर्ट मुख्य ...और पढ़ें

प्रदर्शन में वकीलाें की गिरफ्तारी पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट। फोटो: आर्काइव

प्रदर्शन में वकीलाें की गिरफ्तारी पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. वकीलों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार

  2. पुलिस बर्बरता, वकीलों की गिरफ्तारी पर सुनवाई

  3. लोकतांत्रिक गतिविधियों से कोर्ट कार्य बाधित न हो

नई दिल्ली, प्रेट्र। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह स्पष्ट किया है कि देश के प्रत्येक वकील को निर्धारित स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान वकीलों की गिरफ्तारी और पुलिस की कथित बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। पीठ में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।

वकीलों के प्रदर्शन के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट का ध्यान वकीलों के साथ हुई बदसलूकी की ओर आकर्षित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने वकीलों को हिरासत में लिया, वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत को सड़कों पर घसीटा गया तथा वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी एवं उत्तरा बब्बर को बसों में बंद कर दिया गया।

उन्होंने जनता के बीच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का आदेश सार्वजनिक न होने पर भी गंभीर सवाल उठाए।

पुलिस संयम की मांग और साक्ष्य

शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह पुलिस को संयम बरतने की सख्त हिदायत दे, क्योंकि प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से लाठीचार्ज किया गया, जिसमें बच्चे भी चोटिल हुए।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि वकीलों पर पुलिस की मौजूदगी में हमले हुए हैं और इससे जुड़े वीडियो मंगलवार को पीठ के समक्ष पेश किए जाएंगे।

यह वीडियो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे वकीलों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना और उस दौरान बने स्थितिजन्य घटनाक्रम को दर्शाता है।

संस्थागत मर्यादा और संतुलन का संदेश

सीजेआइ सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट को ऐसे मंच में नहीं तब्दील होना चाहिए जिससे इसकी संस्थागत भूमिका को नुकसान पहुंचे। हालांकि, उन्होंने बार के सदस्यों के लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन किया।

इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआइ ने दोहराया कि लोकतांत्रिक गतिविधियां सुचारु रूप से चलनी चाहिए, लेकिन इससे सुप्रीम कोर्ट के कामकाज या अधिवक्ताओं के आवागमन में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।

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