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दिल्ली कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर को ठहराया दोषी, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनकर की थी जमानत दिलाने की कोशिश

Published: Wed, 26 Aug 2026 07:21 PM (IST)

सुकेश चंद्रशेखर को 2017 के भ्रष्टाचार मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनकर विशेष न्यायाधीश को प्रभावित ...और पढ़ें

दिल्ली कोर्ट ने ठहराया सुकेश चंद्रशेखर दोषी।

दिल्ली कोर्ट ने ठहराया सुकेश चंद्रशेखर दोषी।

HighLights

  1. सुकेश चंद्रशेखर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनकर जमानत दिलाने का दोषी।

  2. 2017 के भ्रष्टाचार मामले में विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने का प्रयास।

  3. अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ठग सुकेश चंद्रशेखर को अदालत ने वर्ष 2017 के भ्रष्टाचार मामले में जमानत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश बनकर विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश करने का दोषी ठहराया है। अदालत ने इस कृत्य को न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और गरिमा पर सीधा हमला बताया। मामले में सजा की अवधि पर 27 अगस्त को सुनवाई होगी।

तीस हजारी स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी हर्षिता मिश्रा ने चंद्रशेखर को आइपीसी की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोषी पाया। अदालत ने 20 अगस्त के आदेश में कहा कि यह मामला लंबे समय तक इस बात की याद दिलाएगा कि कानून की प्रतिष्ठा किसी व्यक्ति की प्रभावशाली आवाज में नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता में निहित है।

सुकेश ने पुलिस कॉन्स्टेबल के मोबाइल तक पहुंच हासिल की

मामला 28 अप्रैल 2017 का है। उस समय चंद्रशेखर भ्रष्टाचार के एक मामले में पुलिस हिरासत में था। अभियोजन के अनुसार उसने पुलिस कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन तक पहुंच हासिल की और इसी फोन से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों की तत्कालीन विशेष न्यायाधीश पूनम चौधरी के सरकारी फोन और मोबाइल पर संपर्क किया।

अदालत के अनुसार चंद्रशेखर ने पहले खुद को तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश का निजी सचिव बताया और बाद में खुद न्यायाधीश बनकर बात की। उसने न्यायाधीश से जल्द से जल्द अपनी जमानत मंजूर करने के लिए कहा। साथ ही ऐसा नहीं करने पर उनके पेशेवर भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की धमकी दी।

सामान्य धोखाधड़ी या पहचान बदलने का मामला नहीं: कोर्ट

अदालत ने कहा कि यह सामान्य धोखाधड़ी या पहचान बदलने का मामला नहीं है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति का पद एक अन्य न्यायिक अधिकारी के फैसले को प्रभावित करने के लिए किया गया। अदालतों में फैसले कानून और साक्ष्यों के आधार पर होते हैं, न कि ऐसे फोन काल से जिनमें किसी प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति का नाम लेकर दबाव बनाया जाए।

अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे साबित किया कि चंद्रशेखर ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति की पहचान अपनाई और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। अदालत ने कहा कि यह पहचान बदलना महज घटना का हिस्सा नहीं था, बल्कि अपने उद्देश्य को पूरा करने का मुख्य साधन था।

मनजीत की भूमिका की भी दोबारा जांच करने का निर्देश

हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस को कांस्टेबल मनजीत की भूमिका की भी दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। पुलिस को यह पता लगाने को कहा गया है कि चंद्रशेखर को उसका मोबाइल कैसे मिला, फोन पर ताला लगा था या नहीं, उसका पासवर्ड किन लोगों को पता था और फोन के इस्तेमाल की सूचना तुरंत क्यों नहीं दी गई।

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