'कब तक बंधक रहेगी राजधानी?' जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों से उठा बड़ा सवाल; संसद और VVIP जोन पर सख्त निगरानी
जंतर-मंतर, जो कभी ग्रहों के अध्ययन का केंद्र था, अब दिल्ली में प्रदर्शनों का मुख्य स्थल बन गया है। इसके ...और पढ़ें
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दिल्ली में पुलिस बल तैनात। जागरण
HighLights
जंतर-मंतर 1724 में ग्रहों के अध्ययन हेतु निर्मित वेधशाला थी।
यह स्थल अब नई दिल्ली में प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र बन गया।
प्रदर्शनों से राजधानी में व्यवधान, स्थल बदलने की मांग तेज।
सौरभ श्रीवास्तव, नई दिल्ली। महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा दिल्ली में 1724 में ग्रहों की गति का अध्ययन करने के लिए बनवाई गई वेधशाला का क्षेत्र जंतर-मंतर विगत कुछ दशकों में जनता के शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन चुका है।
वर्ष 1993 में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन से यहां शुरू हुआ सिलसिला अब इस हद तक बढ़ चुका है कि ये देश की शक्ति के केंद्र नई दिल्ली क्षेत्र को आए दिन बंधक बना लेता है और इस क्षेत्र के लोगों के साथ ही दिल्ली समेत एनसीआर की जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
राष्ट्रीय राजधानी के इस क्षेत्र में संसद है, सत्ता का केंद्र केंद्रीय कार्यालय और सचिवालय हैं, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री निवास के साथ ही मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों व उच्चाधिकारियों के निवास हैं। विभिन्न देशों के दूतावास और विभिन्न राज्यों के भवन हैं।
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गंभीरता से विचार नहीं किया
वहीं, ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को कुछ मुट्ठीभर लोगों द्वारा अपनी मांगें मनवाने के लिए बंधक बना लिया जाना न ही इस क्षेत्र के लोगों के हित में है और न ही देश के। जनता को प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के बजाय दिल्ली के किसी अन्य हिस्से में स्थान देने को लेकर पूर्व में मांग भी हुई और इसे लेकर चर्चाएं भी हुईं, लेकिन उन पर कभी गंभीरता से विचार नहीं किया गया, जिसका खामियाजा दिल्ली की जनता अब तक भुगत रही है।
निर्णय लेना चाहिए
दिल्ली में कांग्रेस से सांसद रहे जेपी अग्रवाल का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार हर किसी को मिलना चाहिए। इसे देखते हुए ही केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शनस्थल के रूप में तय किया था। ऐसे में यदि यहां पर प्रदर्शनों से लोगों को समस्या होती है और सरकार को यह लगता है कि यहां से प्रदर्शन स्थल बदल देना चाहिए तो सरकार को इस पर निर्णय लेना चाहिए।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुभाष चोपड़ा कहते हैं कि हाल में हुए प्रदर्शन बड़े थे, ऐसे में नई दिल्ली के लोगों को परेशानी होना स्वाभाविक है। सरकार चाहे तो बुराड़ी में या रामलीला मैदान को अधिकृत प्रदर्शनस्थल बनाने की अनुमति दे सकती है।
दक्षिणी दिल्ली से मौजूदा भाजपा सांसद रामवीर सिंह विधूड़ी का कहना है कि प्रदर्शनस्थल जंतर-मंतर से बदलकर किसी अन्य स्थान पर ले जाने को लेकर पूर्व में चर्चा होती रही है, जिसे अमल में लाया जाना चाहिए। प्रदर्शन के लिए लालकिले के आसपास कोई जगह चिह्नित की जा सकती है, ताकि लोग लोकतांत्रिक रूप से प्रदर्शनकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा सकें और नई दिल्ली क्षेत्र में कार्यालयों व यहां रहने वालों को किसी तरह की कोई परेशानी भी न होने पाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल कहते हैं कि पूर्व में बोट क्लब पर प्रदर्शन होते थे, लेकिन लोगों की सहूलियत को देखते हुए जंतर-मंतर को प्रदर्शनस्थल बनाया गया था, अब यदि कानून-व्यवस्था की स्थिति बन रही है तो केंद्र सरकार को प्रदर्शन स्थल कहीं और उपलब्ध कराने के बारे में विचार करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि जंतर-मंतर से पूर्व इंडिया गेट बोट क्लब अधिकृत प्रदर्शन स्थल था, जहां वर्ष 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में भाकियू का ऐतिहासिक प्रदर्शन हुआ था। इस धरने में सात लाख किसान सात दिन तक बोट क्लब पर डटे रहे थे और अंततः तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उनकी मांगें माननी पड़ी थीं।
इसके बाद बोट क्लब के पास प्रदर्शन को लेकर सख्ती बरती जाने लगी और 1993 के आसपास से जंतर-मंतर प्रदर्शनस्थल के रूप में तब्दील हो गया। तब से जंतर-मंतर पर छोटे-बड़े हजारों प्रदर्शन हुए हैं। यह स्थल समाजसेवी अन्ना हजारे के लोकपाल की मांग को लेकर किए गए बड़े प्रदर्शन का भी साक्षी रहा है।
