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दक्षिण दिल्ली की 420 किमी सड़कों पर एआई का पहरा, जाम और हादसों से मिलेगी मुक्ति

Published: Thu, 17 Sep 2026 10:39 PM (IST)

दक्षिण दिल्ली में जाम और सड़क हादसों को कम करने के लिए 420 किमी से अधिक सड़क नेटवर्क का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित ट्रैफिक और सुरक्षा आडिट किया जाएगा।

दक्षिण दिल्ली की 420 किमी सड़कों पर एआई से होगा ट्रैफिक मैनेज। (एआई जेनरेटेड इमेज)

दक्षिण दिल्ली की 420 किमी सड़कों पर एआई से होगा ट्रैफिक मैनेज। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. दक्षिण दिल्ली की 420 किमी सड़कों का एआई आडिट होगा।

  2. जाम और सड़क हादसों को कम करना मुख्य उद्देश्य।

  3. पीडब्ल्यूडी 3.5 करोड़ की लागत से सलाहकार नियुक्त करेगा।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली में जाम और सड़क हादसों को कम करने के लिए 420 किमी से अधिक सड़क नेटवर्क का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित ट्रैफिक और सुरक्षा आडिट कराया जाएगा। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इस अध्ययन के जरिये यह पता लगाएगा कि किन सड़कों और चौराहों पर सबसे ज्यादा जाम रहता है, कहां यातायात की रफ्तार प्रभावित होती है और किन स्थानों पर हादसों का खतरा अधिक है।

इस अध्ययन के दायरे में करीब 270 सड़कें आएंगी। इनमें बाहरी रिंग रोड, रिंग रोड, महरौली-बदरपुर रोड, लाला लाजपत राय मार्ग, हंसराज गुप्ता मार्ग, अरबिंदो मार्ग और महाराजा अग्रसेन मार्ग जैसी प्रमुख सड़कें शामिल हैं। इसके लिए करीब 3.5 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सलाहकार नियुक्त करने की योजना है।

जाम वाले स्थानों पर पहले होगा काम

अध्ययन के आधार पर जाम वाले स्थानों और अधिक दबाव वाले मार्गों के लिए छोटी अवधि में किए जा सकने वाले सुधारों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें ट्रैफिक प्रबंधन, सड़क व्यवस्था में बदलाव और कम लागत वाले इंजीनियरिंग कार्य शामिल होंगे। साथ ही हर काम को प्राथमिकता देने और उसकी अनुमानित लागत बताने की योजना है।

जहां जरूरत होगी, वहां नए फ्लाईओवर, अंडरपास या एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की जरूरत भी देखी जाएगी। इसके लिए संबंधित सड़कों पर यातायात की मौजूदा स्थिति और भविष्य में बढ़ने वाले दबाव का अध्ययन किया जाएगा।

कैमरों से हादसों पर भी नजर

सड़क सुरक्षा के तहत पीडब्ल्यूडी यह भी देखेगा कि किन सड़कों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी है और कहां इसकी जरूरत है। हादसे या किसी अन्य घटना का अपने आप पता लगाने वाली व्यवस्था की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

अध्ययन में निजी वाहनों के साथ बस और मेट्रो की स्थिति भी देखी जाएगी। लोगों को बस या मेट्रो तक पहुंचने के लिए मिलने वाली अंतिम छोर की परिवहन सुविधा में कहां सुधार की जरूरत है, इसका भी आकलन होगा।

बढ़ते यातायात का दबाव

पीडब्ल्यूडी के अनुसार दिल्ली में स्थानीय और दूसरे क्षेत्रों से आने-जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने से सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे जाम, वाहनों से निकलने वाले धुएं और लोगों के सफर में लगने वाला समय बढ़ रहा है। अध्ययन का उद्देश्य सड़क, सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम तय करना है।

पीडब्ल्यूडी के पास दिल्ली में 60 फुट या उससे अधिक चौड़ी करीब 1,400 किमी सड़कों का नेटवर्क है। दक्षिण दिल्ली में जाम कम करने के लिए मोदी मिल फ्लाईओवर एकीकरण, बारापुला फेज-3 और ओखला फ्लाईओवर की मरम्मत जैसे काम भी चल रहे हैं।

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