'100 साल बाद भी कारगर है गांधीवादी रास्ता', मेदांता से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक ने 26 दिन के उपवास के बाद राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और उनके अहिंसात्मक मार्ग ...और पढ़ें
HighLights
सोनम वांगचुक ने 26 दिन के उपवास के बाद गांधीजी को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने गांधीजी के अहिंसात्मक मार्ग को आज भी बेहद प्रासंगिक बताया।
वांगचुक ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की अपील की।
एएनआई, नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के उपवास और आंदोलन के समापन के बाद राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गांधीजी द्वारा दिखाया गया अहिंसात्मक मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक और उपयुक्त है, जितना सौ साल पहले था।
वांगचुक ने बताया कि वे पिछले पांच-छह वर्षों से लद्दाख में गांधीवादी तरीकों का अभ्यास और प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने पाया कि यह तरीका स्थानीय स्तर पर बेहद कारगर साबित हो रहा है। हालांकि, उन्हें शुरू में संदेह था कि क्या यह राष्ट्रीय स्तर पर भी सफल होगा।
गांधी के बताए मार्ग हजार साल बाद भी प्रासंगिक रहेंगे: वांगचुक
राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के माध्यम से उन्हें विश्वास हो गया है कि गांधीजी का मार्ग राष्ट्रीय स्तर पर भी पूरी तरह प्रासंगिक है। यह न सिर्फ आज काम कर रहा है, बल्कि आने वाले सौ या हजार साल तक भी प्रासंगिक बना रहेगा।
सोनम वांगचुक ने देशवासियों और विश्व के लोगों से अपील की कि अपनी शिकायतों और मांगों को बापू द्वारा दिखाए गए शांतिपूर्ण मार्ग से ही उठाएं। उन्होंने कहा कि समाधान में समय लग सकता है, लेकिन यह कभी अंधेरे में नहीं जाता। पहली कोशिश में सफलता न मिले तो भी निरंतर प्रयास से परिणाम जरूर मिलता है।
