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पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क आतंकी घोषित, अब मददगारों पर लगेगा देशद्रोह का केस

Published: Thu, 17 Sep 2026 10:05 AM (IST)

पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया है, जिससे भारतीय जांच एजेंसियों को इसके खिलाफ कार्रवाई करने में बड़ी मदद मिलेगी।

आतंकियों की मदद करने वालों पर लगेगी देशद्रोह की धारा। AI जनरेटेड

आतंकियों की मदद करने वालों पर लगेगी देशद्रोह की धारा। AI जनरेटेड

HighLights

  1. शहजाद भट्टी नेटवर्क यूएपीए के तहत आतंकी संगठन घोषित, कार्रवाई में आसानी।

  2. जांच एजेंसियों को अब मजबूत कानूनी अधिकार, कार्रवाई का दायरा बढ़ा।

  3. नेटवर्क से जुड़ने पर देशद्रोह, जमानत के नियम अब और सख्त।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश के लिए बहुत ही घातक साबित हो रहे पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए अब भारतीय जांच एजेक्सियों और राज्यों की आतंकवाद निरोधक यूनिटों को भारी मदद मिलेगी।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पिछले काफी समय से शहजाद को मोहरा बनाकर उसके नाम पर देश में आतंकी गतिविधि फैलाने में जुटी हुई है।

अब लगेगी देशद्रोह की धारा

इस नेटवर्क को आतंकी घोषित कर दिए जाने से अब इससे किसी के जुड़ते ही वो भी आतंकी की सूची में आ जाएगा और उसके खिलाफ देशद्रोह की धारा लगाकर जेल में बंद कर कारवाई शुरू कर दी जाएगी। इससे भारतीय एजेंसियों को कई कानूनी अधिकार मिल जाएगा।

गृह मंत्रालय की ओर से इस नेटवर्क को यूएपीए की पहली शेड्यूल में आतंकी संगठन के तौर पर नामित किए जाने के बाद इस नेटवर्क के खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए एजेंसियों को मजबूत कानूनी ढांचा मिल गया है।

कैसे होगी कार्रवाई?

अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की जांच सिर्फ किसी एक आपराधिक वारदात के संदर्भ में नहीं, बल्कि संगठन से उनके संबंध, उसकी फंडिंग, भर्ती, हथियारों और डिजिटल नेटवर्क जैसे अलग-अलग पहलुओं से भी की जा सकती है।

इस नेटवर्क से जुड़ना भी बन सकता है अपराध

  • यानी यूएपीए के तहत किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़ना, उसके लिए लोगों की भर्ती करना या उसके नेटवर्क को चलाने में मदद करना अपराध के दायरे में आ सकता है। जांच एजेंसियां अब सिर्फ यह नहीं देखेंगी कि किसी आरोपी ने कोई वारदात की या नहीं।
  • जमानत के नियम ज्यादा सख्त। यूएपीए में जमानत के प्रविधान सामान्य आपराधिक कानून की तुलना में ज्यादा सख्त हैं। ऐसे मामलों में आरोपी के लिए जमानत हासिल करना कठिन हो सकता है। अगर जांच के दौरान हथियार, विस्फोटक या फिंगरप्रिंट जैसे साक्ष्य सामने आते हैं, तो कुछ परिस्थितियों में कानून के तहत अदालत के स्तर पर अभियोजन के पक्ष में कानूनी अनुमान लागू हो सकता है।
  • पुलिस कस्टडी के लिए ज्यादा समय: यूएपीए का एक बड़ा पहलू है जांच के लिए मिलने वाला अतिरिक्त समय। पुलिस कस्टडी की अवधि 15 दिन से बढ़कर 30 दिन तक हो सकती है।
  • चार्जशीट के लिए 180 दिन तक का समय। जांच एजेंसियों को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन तक का समय मिल सकता है।

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