लापता प्रॉपर्टी डीलर के शव का बिना पहचान अंतिम संस्कार क्यों? SC ने दिल्ली-गुरुग्राम पुलिस से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के लापता प्रॉपर्टी डीलर युवराज सिंह मनचंदा के मामले में दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस को नोटिस ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-गुरुग्राम पुलिस को नोटिस जारी किया।
लापता प्रॉपर्टी डीलर के शव का बिना पहचान अंतिम संस्कार।
सीसीटीएनएस पोर्टल पर जानकारी अपलोड न करने पर सवाल।
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के लापता प्रॉपर्टी डीलर युवराज सिंह मनचंदा के मामले में दिल्ली पुलिस और गुरुग्राम पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि पहचान न होने के बावजूद शव का अंतिम संस्कार क्यों किया गया। मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी।
मनचंदा का शव गुरुग्राम के एक नाले से बरामद किया गया था। हरियाणा पुलिस ने 10 सितंबर को ये शव बरामद किया था, 14 को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके परिवार को 16 सितंबर को सूचित किया गया।
उनके स्वजनों ने आरोप लगाया था कि शव की बरामदगी को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई और शव की पहचान किए बगैर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में अन्या वत्स और उनके पति संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच की जा रही है।
'सीसीटीएनएस पोर्टल पर अपलोड क्यों नहीं किया गया'
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और आर महादेवन की बेंच ने गुरुग्राम पुलिस से पूछा है कि शव बरामदगी के बारे में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) पोर्टल पर अपलोड क्यों नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान, मानव तस्करी से जुड़ी समिति की चेयरपर्सन और सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोर्ट की टिप्पणियों के आधार पर, उन्होंने दिल्ली के एक व्यक्ति के लापता होने की घटना के संबंध में निर्देश लिए हैं।
उन्होंने बताया कि तीन दिन बाद उस व्यक्ति का शव गुरुग्राम से बरामद किए जाने और पहचान न हो पाने के चलते अंतिम संस्कार किए जाने का पता चला।
'हर लापता व्यक्ति के संबंध में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए'
इस मामले में पूर्व की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने आदेश के जरिये सूचित किया था कि उम्र और लिंग से परे हर लापता व्यक्ति के संबंध में तत्काल एफआइआर दर्ज की जाए। एक रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 47,000 बच्चे लापता हैं।
