'आप हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते?', नोएडा हिंसा में गिरफ्तार छात्रा को जमानत से SC का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने की आरोपी छात्रा आकृति चौधरी को जमानत देने से इनकार कर दिया।

नोएडा हिंसा केस में आकृति चौधरी को जमानत से इनकार। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
पीटीआई, नई दिल्ली। नोएडा में 13 अप्रैल को औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने की आरोपित एक छात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जमानत देने से इन्कार कर दिया। साथ ही उसे इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने आरोपित आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील से कहा, 'आप हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई संविधान के अनुच्छेद-32 (मौलिक अधिकारों के हनन पर सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार) के तहत याचिका दायर करके यहीं आ जाता है। सुप्रीम कोर्ट में 93,000 मामले लंबित हैं।'
आकृति की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि पुलिस ने गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए हैं और जमानत देने की मांग की। उन्होंने बताया कि आकृति दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा है। नोएडा की एक अदालत ने इससे पहले नोएडा में हिंसा भड़काने की आरोपित तीन महिलाओं- आकृति, मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता की सशर्त पुलिस रिमांड की अनुमति दी थी।
क्या बोले आरोपितों के वकील
अदालत ने उनके वकीलों को भी जांच के दौरान मौजूद रहने की अनुमति दी थी। आकृति और सृष्टि दोनों दिल्ली की रहने वाली हैं और उनकी उम्र 20 वर्ष के आसपास है।
आकृति ने दौलत राम कॉलेज से इतिहास में परास्नातक किया है, जबकि मनीषा नोएडा की एक औद्योगिक इकाई में श्रमिक है। हिरासत के लिए दी गई अर्जी में पुलिस ने दलील दी थी कि आरोपितों के घर से अहम सुबूत मिलने की पूरी संभावना है।
पिछले महीने नोएडा के कुछ हिस्सों में मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री मजदूरों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था।
अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों के बड़ी संख्या में श्रमिक लंबे समय से अटकी अपनी वेतन वृद्धि की मांग पर जोर देने के लिए एकत्रित हुए और प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की। बाद में यह विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की, पथराव किया और वाहनों में आग लगा दी।
