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सराय काले खां ISBT के पुनर्विकास पर ब्रेक, वैकल्पिक बस अड्डा नहीं मिलने से अटका प्रोजेक्ट

Published: Sat, 08 Aug 2026 12:44 AM (IST)

सराय काले खां आईएसबीटी का बहुप्रतीक्षित पुनर्विकास वैकल्पिक स्थल न मिलने के कारण रुक गया है। परिवहन विभाग अब दिल्ली ...और पढ़ें

सराय काले खां आईएसबीटी का बहुप्रतीक्षित पुनर्विकास वैकल्पिक स्थल न मिलने के कारण रुक गया है।

सराय काले खां आईएसबीटी का बहुप्रतीक्षित पुनर्विकास वैकल्पिक स्थल न मिलने के कारण रुक गया है।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी के प्रमुख अंतर्राज्यीय बस अड्डों में शामिल सराय काले खां आइएसबीटी के बहुप्रतीक्षित पुनर्विकास पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तीन महीने पहले तैयार हो चुका है, लेकिन निर्माण के दौरान अंतर्राज्यीय बसों के संचालन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

परिवहन विभाग ने शुरुआत में नमो भारत स्टेशन के नीचे उपलब्ध खाली क्षेत्र में अस्थायी रूप से बस संचालन स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा था। इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने इसे मंजूरी नहीं दी।

निगम का कहना है कि स्टेशन परिसर और उसके आसपास बहु-मोडल परिवहन एकीकरण से जुड़े बुनियादी ढांचे का निर्माण प्रस्तावित है, इसलिए वहां बस संचालन संभव नहीं है। इसके बाद परिवहन विभाग ने वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से संपर्क किया है।

यहां से से रोजाना सैकड़ों अंतर्राज्यीय और स्थानीय डीटीसी बसें चलती हैं। यहाँ से जयपुर, मथुरा, आगरा, चंडीगढ़, और हरिद्वार जैसे पड़ोसी राज्यों के प्रमुख शहरों के लिए रोजाना 600 से अधिक बसें उपलब्ध होती हैं, जबकि स्थानीय रूटों पर दर्जनों डीटीसी बसें गुजरती हैं। इस आइएसबीटी को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीअोडी) माडल पर विकसित किया जाना है, जिससे अंतरराज्यीय बस सेवा को दिल्ली मेट्रो, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और नमो भारत नेटवर्क से एकीकृत किया जा सके।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल पर काम होना है। वर्तमान में सराय काले खां क्षेत्र दिल्ली के सबसे व्यस्त यातायात केंद्रों में शामिल है। रिंग रोड, मथुरा रोड, बारापुला फ्लाईओवर, डीएनडी कारिडोर और एनएच-44 का यातायात यहां मिलता है, जिससे पीक आवर्स में लंबा जाम लगना आम बात है।

सराय काले खां आइएसपीटी पर पुनर्विकास के तहत होने हैं ये काम

  • 36 एकड़ क्षेत्र को एक आधुनिक मल्टीमाडल ट्रांसपोर्ट: इसके तहत करीब 36 एकड़ क्षेत्र को एक आधुनिक मल्टीमाडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में बदला जाना है। इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए बस, मेट्रो, रेल और नमो भारत (आरआरटीएस) सेवाओं को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
  • परिवहन सुविधाएं: अंतर-राज्यीय और शहर के भीतर चलने वाली बसों (इंट्रा-सिटी और इंटरसिटी) के लिए अलग और व्यवस्थित प्रविधान होगा।
  • यात्री सुविधाएं: टर्मिनल भवन में एस्केलेटर, लिफ्ट, एयर कंडीशनिंग, और आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम की व्यवस्था।
  • सुरक्षा एवं प्रबंधन: सीसीटीवी कैमरे, आधुनिक सुरक्षा उपकरण, और आपदा प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना।पार्किंग और बुनियादी ढांचा: बसों, कारों, टैक्सियों और दोपहिया वाहनों के लिए बेसमेंट पार्किंग का निर्माण।
  • कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट: पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल के तहत व्यावसायिक और रियल एस्टेट क्षेत्रों का विकास।

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