'केवल विरोध-प्रदर्शन या सत्ता परिवर्तन की कोशिश', 4 नवंबर को वाराणसी में संत समाज करेंगे चर्चा
दिल्ली, मुंबई सहित प्रमुख शहरों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिशों को लेकर संत समाज ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
संत समाज विरोध प्रदर्शनों से सत्ता परिवर्तन पर चिंतित।
4 नवंबर को वाराणसी में होगी संस्कृति संसद।
लोकतंत्र बचाने में संतों की भूमिका पर होगा विचार।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। दिल्ली, मुंबई समेत देश के कुछ प्रमुख शहरों में नियमित विरोध प्रदर्शनों और उसके जरिए देश में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों को संत समाज ने बेहद गंभीरता से लिया है। चार नवंबर को वाराणसी में होने वाली संस्कृति संसद में इस मुद्दे पर विशेष मंथन के साथ उनके द्वारा आगे कि रणनीति तय की जाएगी।
बैठक में विहिप, अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद और गंगा महासभा के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ देशभर के प्रमुख धर्माचार्य शामिल होंगे।
वाराणसी बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा
चर्चा अराजकता से सत्ता परिवर्तन की मंशा, उसकी व्यापकता और लोकतंत्र में भरोसे के सवाल पर होगी। खासकर संत समाज की चिंता, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में सड़क के हिंसक आंदोलनों के जरिए चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने और उसकी आग फ्रांस, पेरिस तथा अन्य देशों में फैलने से बढ़ी है। भारत में भी नीट पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुए आंदोलन अब बढ़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गई है।
प्रदर्शनों के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश?
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने इसे गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि सीईसी के इस्तीफे को लेकर चल रहे आंदोलन से जुड़े नेताओं ने खुले तौर पर सत्ता परिवर्तन की मंशा जाहिर की है।
आंदोलन को दिशा दे रहे सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई देश में सत्ता परिवर्तन के लिए है और इसमें कुछ गलत नहीं है। वहीं, आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं में एक आइसा की प्रमुख ने बांग्लादेश के हिंसक आंदोलन से प्रेरणा लेने की बात कही है।
1 नवंबर को होगी कांग्रेस की रैली
यह तब जबकि, दिल्ली में दो अक्टूबर से सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर खासकर कनॉट प्लेस जैसे दिल्ली के व्यस्तम क्षेत्रों में प्रदर्शन जारी हैं। जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस और आइएनडीआइए गठबंधन तथा कॉकरोच जनता पार्टी-आइसा-आम आदमी पार्टी अलग-अलग आंदोलन कर रहे हैं। आगे अब कांग्रेस पार्टी द्वारा एक नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली आयोजित की गई है।
लोकतंत्र बचाने में संतों की भीमिका
स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने आगे कहा कि इन प्रदर्शनों से सवाल भीड़तंत्र बनाम लोकतंत्र का गहराता जा रहा है। जिसमें संतों तथा उनसे जुड़े संगठनों की भी भूमिका अहम हो जाती है कि वह लोकतंत्र को बचाने के लिए क्या करें। उसमें युवाओं व समाज की जागरूकता अभियान के साथ खुलकर विरोध करने की रणनीति हो सकती है।
