जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली : कराला स्थित श्री रामऋषि संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत अकादमी की ओर से निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस मौके पर विद्यालय के अध्यक्ष जानकी प्रसाद गुप्ता ने कहा कि संस्कृत भाषा में लिखा गया ज्ञान-विज्ञान विश्व को सांस्कृतिक चिन्तन देने का कार्य कर रहा है । यह विश्व की प्रथम भाषा है। आज संस्कृत के गौरव, अस्मिता, संस्कृति, सभ्यता को सुरक्षित करने के लिए संस्कृत के पठन-पाठन व विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। संस्कृत को विश्व स्तर की भाषा बनाने के लिये हमें और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। इसके साथ-साथ उन्होंने बताया विद्यालय में 114 वर्षों से दिल्ली में संस्कृत के पठन-पाठन का कार्य निरंतर चल रहा है।

इस मौके पर अकादमी के सचिव डॉ. जीतराम भट्ट ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विश्व के शिक्षा का केंद्र रहा है। यहां के अनेक विश्वविद्यालय विश्व स्तर पर प्रसिद्ध थे। जिसमें तक्षशिला, विक्रमशिला, नालन्दा, पुष्पागिरी प्रमुख थे। यहां देश-विदेश के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। विद्यालय में आयोजित प्रतियोगिता में 30 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। निबंध लेखन के तहत विद्यार्थियों ने अलग-अलग विचारों को पेश किया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्रचार्य डॉ. अशोक डबराल ने कहा कि भारतीय सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। संस्कृत भाषा अनेकता में एकता का संदेश सदियों से देती आई है। यह भाषा मानव सभ्यता के प्राचीनतम इतिहास से जुड़ी है। इस अवसर पर राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान परिषद के पूर्व संस्कृत एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राम करण डबास भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम श्री रामऋषि संस्कृत महाविद्यालय कराला के सान्निध्य में हुआ। इस दौरान विद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामभज, डॉ. आनन्द अनन्त वेताल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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