'मुझे बचा लो, दम घुट रहा है', साकेत में इमारत ढहने के बाद मलबे में दबे युवक की दर्दनाक पुकार
दिल्ली के साकेत में एक इमारत ढहने के बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है, जहां एक युवक ...और पढ़ें

दिल्ली के साकेत में पांच मंजिला इमारत ढहने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
HighLights
मलबे में फंसे युवक ने फोन पर मांगी मदद।
छात्र अपने लापता दोस्तों की तलाश में जुटे।
अवैध निर्माण पर प्रशासन की मिलीभगत पर सवाल।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। मुझे बचा लो मैं अंदर फंसा हुआ हूं। रवि को तलाशने के लिए जब उसका एक दोस्त लगातार फोन कर रहा था तो रवि ने फोन नहीं उठाया। लेकिन बार-बार फोन बजने पर मलबे में फंसे दूसरे व्यक्ति ने फोन उठाया। कहां मैं भी फंसा हुआ हूं। मुझे बचा लो क्योंकि यहां दम घुट रहा है। जब उसके दोस्त पोंटी ने पूछा कि रवि कहां है तो उसने कहा कि रवि नहीं है। फोन बार-बार बज रहा था तो जैसे तैसे फोन पकड़कर उठाया है।
यह कहानी केवल एक रवि की नहीं है। घटना स्थल के बाहर मौजूद छात्र अपने दोस्तों की तलाश में जुटे हुए हैं। उनका फोन मिलाकर कोशिश कर रहे हैं कि बस एक बार पता चल जाए कि स्थिति है क्या। लेकिन, कोई फोन न उठने और संपर्क न होने की वजह छात्रों का रो-रो का बुरा हाल है। साथ ही कई छात्र सदमे में है।

एक छात्र राहुल (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उनका दोस्त फंसा हुआ है। वह लाइब्रेरी से पढ़ने के बाद अपनी दोस्त के साथ खाना खाने गया था। जहां उसकी दोस्त आस्था तो निकाल ली गई है लेकिन रवि नहीं मिल रहा है। वहीं, दूसरे छात्र भी है। चूंकि छात्रों की संख्या 700-800 हुआ करती थी तो सभी को पहनाना मुश्किल है।

हालांकि जो-जो छात्र यहां पहुंच रहे हैं वह अपने साथियों को पता कर रहे हैं कि वह ठीक है या नहीं। जिन लोगों के फोन नहीं उठ रहे हैं उनके घटना में फंसे होने की आंशका जताई जा रही है। छात्र अपने दोस्तों की सही सलामती की प्रार्थना भगवान से कर रहे हैं।
-1780169295459.jpeg)
उन्होंने कहा कि सभी के माता पिता भी देश के विभिन्न इलाकों में रहते हैं और वह अपने बच्चों से संपर्क न हो पाने की वजह से परेशान हैं। दीपक नाम का एक छात्र भी लापता होने की वजह से उसके दोस्त परेशान हैं और उसका फोन मिलाकर उसकी जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं।

दिल्ली में अवैध निर्माण पर कितने लोगों की और जाएगी जान
राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण के कारण हर वर्ष लोगों की जान चली जाती है। सैदुलाजाब की घटना ने अवैध निर्माण पर प्रशासन की मिलीभगत की कलई खोल दी है। यह हाल तब है जब दिल्ली में मानसून के कारण खतरनाक इमारतों की पहचान का सर्वे हुआ होता है।

अच्छा हुआ नहीं थी कोई क्लास
घटना स्थल पर छात्र गनीमत मान रहे हैं कि आज कोई क्लास नहीं थी। एक छात्र ने बताया कि क्लास होने के बाद जिस कैंटीन पर इमारत गिरी हैं वहां 200-300 बच्चे रहते हैं। वह तो गनीमत रही कि आज कोई क्लास नहीं थी।
उन्होंने बताया कि रविवार को प्रो विज की क्लास होनी थी। शनिवार को क्लास न होने की वजह से लाइब्रेरी में कम ही छात्र आए थे। जहां पर कोचिंग चल रही थी उसका नाम एराइज है। वहां पर 700-800 बच्चे क्लास लेने आते हैं। जब क्लास खत्म होती तो ज्यादातर बच्चे आंटी की कैंटीन से ही खाना खाते हैं। क्योंकि मात्र 70 रुपये में भरपेट खाना मिल जाता है।
