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चोट लगने के बावजूद नहीं दर्ज हुई FIR, कोर्ट ने DCP को दिए 24 घंटे में मामला दर्ज कराने के निर्देश

Published: Mon, 28 Sep 2026 08:35 PM (IST)

रोहिणी कोर्ट ने सड़क हादसे में घायल महिला की एफआईआर दर्ज न करने पर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल ...और पढ़ें

रोहिणी कोर्ट ने डीसीपी को 24 घंटे में मामला दर्ज करने का दिया आदेश।

रोहिणी कोर्ट ने डीसीपी को 24 घंटे में मामला दर्ज करने का दिया आदेश।

HighLights

  1. रोहिणी कोर्ट ने सड़क हादसे में घायल महिला की एफआईआर दर्ज करने का आदेश।

  2. पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने दिया सख्त निर्देश।

  3. संबंधित डीसीपी को 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश।

जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। सड़क हादसे में महिला के घायल होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर रोहिणी कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संबंधित डीसीपी को 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने डीसीपी से यह भी कहा है कि वह संबंधित जांच अधिकारी (आइओ) की ओर से प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के संबंध में भी स्पष्टीकरण रिपोर्ट पेश करें। जेएमएफसी-वन रिषभ कपूर की अदालत ने 25 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।

शिकायतकर्ता कौशल कुमारी अदालत में स्वयं पेश हुईं

मामले में शिकायतकर्ता कौशल कुमारी अदालत में स्वयं पेश हुईं थी। उनके विधिक सहायता अधिवक्ता सत्यम सिसोदिया ने बताया कि मामले में अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल प्रेम नाथ की ओर से पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पहले से रिकार्ड पर है और उसका अवलोकन किया गया है।

रिपोर्ट से सामने आया कि घटना में शिकायतकर्ता के घायल होने की बात पुलिस ने खारिज नहीं की है। इसके बावजूद पुलिस ने इस आधार पर मामले को आगे नहीं बढ़ाया कि शिकायतकर्ता और कथित वाहन चालक के बीच समझौता हो गया था। घटना में गंभीर चोटें आने का उल्लेख मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) में भी है। समझौता शिकायतकर्ता की स्वेच्छा से नहीं हुआ था और संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को

कोर्ट ने संबंधित डीसीपी को निर्देश दिया कि कथित वाहन चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 281/125(बी) के तहत 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज कराना सुनिश्चित करें। मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर 2026 को होगी।

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