गणतंत्र दिवस पर दिखेगी 'वंदे मातरम' की लंबी गौरवशाली यात्रा, देश के चारों कोनों से आए लोक कलाकार लेंगे हिस्सा
इस गणतंत्र दिवस पर संस्कृति मंत्रालय की झांकी 'वंदे मातरम के 150 वर्ष' थीम पर आधारित होगी। यह राष्ट्रगीत की ...और पढ़ें

संस्कृति मंत्रालय की झांकी देश की सामूहिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव का जीवंत दस्तावेज पेश करेगी।
HighLights
झांकी की थीम 'वंदे मातरम के 150 वर्ष' निर्धारित की गई है।
स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को झांकी में दर्शाया गया है।
भारत माता को तिरंगे के साथ प्रेरणा स्रोत दिखाया गया है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर संस्कृति मंत्रालय की झांकी देश की सामूहिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव का जीवंत दस्तावेज पेश करेगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आइजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने संस्कृति मंत्रालय की झांकी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह केवल एक विभाग का प्रदर्शन नहीं है बल्कि एक राष्ट्र की भावनाओं और उसका इतिहास है।
इस वर्ष झांकी की थीम वंदे मातरम के 150 वर्ष निर्धारित की गई है। जो राष्ट्रगीत की डेढ़ शताब्दी लंबी प्रेरक और सांस्कृतिक यात्रा को कलात्मक रूप में दुनिया के सामने पेश करेगी।
इसके अलावा डॉ. जोशी ने बताया कि 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारत के लिए केवल एक गीत नहीं बल्कि श्री अरविंद की दृष्टि में वह आध्यात्मिक शक्ति थी। जिसने गुलामी की जंजीरों में जकड़े भारत की सामूहिक चेतना को जगाया था और झांकी के माध्यम से उसी पुकार को एक दृश्य रूप दिया गया है, जिसमें राष्ट्र को सुजलाम- सुफलाम माता के रूप में वंदनीय दिखाया गया है।
झांकी के आगे चलते हुए ट्रैक्टर पर वंदे मातरम् की ऐतिहासिक पांडुलिपि को प्रदर्शित किया गया है, जिसके इर्द- गिर्द देश के चारों कोनों से आए लोक कलाकार भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाते दिखेंगे। झांकी के मध्य भाग में आज की युवा पीढ़ी (जेन- जी) वंदे मातरम गीत का गायन करते दिखाया जाएगा। यह गायन विष्णुपंत पागनीस की ऐतिहासिक धुन से प्रेरित होगी, जिसे उन्होंने राग सारंग में रिकार्ड किया था और औपनिवेशिक विचार को निषेध करने के लिए इसके अंतरों का क्रम बदल दिया था।
इसके अलावा क्रांतिकारियों के बलिदान को नमन करते हुए झांकी में शहीद मदनलाल ढींगरा और खुदीराम बोस को वंदे मातरम् का स्मरण करते हुए दर्शाया गया है, जो राष्ट्रभक्ति के उस दौर की याद दिलाएंगे। जब क्रांतिकारी इस गीत को गाते हुए फांसी के फंदे पर झूल जाते थे। झांकी के अंतिम पड़ाव में भारत माता को हाथ में तिरंगा थामे दिखाया गया है, जो वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के अक्षय स्रोत के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
