लाल किला ब्लास्ट केस: कौन मुजफ्फर अहमद है? NIA की जांच में अल-कायदा कनेक्शन आया सामने
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लाल किला बम धमाके की जांच में तीन और आरोपियों को नामजद किया है, जिसमें डॉ. मुजफ्फर अहमद मुख्य साजिशकर्ता है।
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NIA ने लाल किला बम धमाके की जांच में तीन और आरोपियों को नामजद किया है। (AI Generated Image)
HighLights
NIA ने लाल किला बम धमाके में तीन नए आरोपी नामजद किए।
डॉ. मुजफ्फर अहमद मुख्य साजिशकर्ता, अल-कायदा से जुड़ा पाया गया।
फरीदाबाद में TATP विस्फोटक तैयार हुए, कश्मीर से हथियार सप्लाई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को आतंकी साजिश के कई नए सुराग मिले हैं। एजेंसी ने पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआइए अदालत में दाखिल पूरक आरोपपत्र में तीन और आरोपितों को नामजद करते हुए दावा किया कि यह हमला लंबे समय से सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
एनआइए ने फरार आरोपित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज उर्फ जफर, जमीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद भट को पूरक आरोपपत्र में शामिल किया है। एनआईए ने डॉ. मुजफ्फर को हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल बताया है। इसके साथ ही मामले में अब तक आरोपपत्र दाखिल किए गए आरोपितों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
मुजफ्फर अहमद कौन है?
एनआईए के अनुसार, मुजफ्फर अहमद एमबीबीएस और एमडी है व सह-आरोपित डॉ. आदिल अहमद राथर का बड़ा भाई है। जांच में उसे अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) इंटरिम का संस्थापक सदस्य पाया गया है। एजेंसी का दावा है कि उसने डॉ. उमर उन नबी, मुजम्मिल, डॉ. आदिल और मुफ्ती इरफान के साथ मिलकर 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए वाहन आधारित बम विस्फोट (वीबीआइईडी) की पूरी साजिश रची थी। इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह में हुई एक गुप्त बैठक के दौरान एजीयूएच इंटरिम आतंकी माड्यूल का गठन किया गया था। मुजफ्फर इस बैठक में मौजूद था और बाद में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में बनाए गए गुप्त ठिकाने पर टीएटीपी (ट्राइएसीटोन ट्राइपराक्साइड) आधारित आइईडी तैयार करने, उनका परीक्षण करने और सुरक्षित रखने में सक्रिय भूमिका निभाता रहा।
टीएटीपी एक अत्यधिक शक्तिशाली घरेलू विस्फोटक माना जाता है। इसी जगह यहीं विस्फोटकों का निर्माण, परीक्षण और भंडारण किया गया।
दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ था आतंकी नेटवर्क
आरोपपत्र के अनुसार जम्मू-कश्मीर से संचालित आतंकी नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ था, जहां फरीदाबाद में गुप्त ठिकाने पर विस्फोटक तैयार किए जा रहे थे, जबकि हथियारों और धन की आपूर्ति अलग चैनलों के जरिए की जा रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि जून 2022 में श्रीनगर के ईदगाह में हुई गुप्त बैठक में एजीयूएच इंटरिम आतंकी माड्यूल की नींव रखी गई थी।
एनआइए के अनुसार गिरफ्तार आरोपित जमीर अहमद अहंगर संगठन का ओवरग्राउंड वर्कर था, जो आतंकियों तक हथियार, गोला-बारूद और नकदी पहुंचाने का काम करता था। वहीं तुफैल अहमद भट, जो प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का पूर्व ओवरग्राउंड वर्कर रहा है, ने हैंडलरों के जरिए एके-47, क्रिंकोव राइफल, पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस हासिल कर मुख्य आरोपी डा. उमर उन नबी को करीब तीन लाख रुपये में उपलब्ध कराए।
मुजफ्फर अहमद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी
एनआइए ने फरार मुजफ्फर अहमद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराया है। एजेंसी का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी और अन्य कार्रवाई की जा रही है।
एनआईए ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ फोरेंसिक जांच, डिजिटल साक्ष्य, जियो-लोकेशन मैपिंग और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल के आधार पर मजबूत साक्ष्य जुटाए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस आतंकी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
