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राजधानी दिल्ली का एक ऐसा गांव, जहां ग्रामीणों को खुद देना पड़ता है ठीकरी पहरा; चोरों का बढ़ा आतंक

Published: Wed, 16 Sep 2026 08:52 PM (IST)

बाहरी दिल्ली के रानीखेड़ा गांव में चोरी की बढ़ती घटनाओं से परेशान ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा के लिए 'ठीकरी पहरा' ...और पढ़ें

रानीखेड़ा गांव में लोगों को देना पड़ता है ठीकरी पहरा।

रानीखेड़ा गांव में लोगों को देना पड़ता है ठीकरी पहरा।

HighLights

  1. रानीखेड़ा गांव में चोरी की घटनाएं सर्दियों में बढ़ीं।

  2. ग्रामीणों ने जानमाल की सुरक्षा के लिए 'ठीकरी पहरा' शुरू किया।

  3. पुलिस ने गश्त बढ़ाने और अपराधियों को पकड़ने का आश्वासन दिया।

संजय कुमार, बाहरी दिल्ली। रानीखेड़ा देश की राजधानी का एक ऐसा गांव है, जहां आज भी लोगों को ठीकरी पहरा लगाकर अपने जानमाल की सुरक्षा करनी पड़ रही है। यह हालत तब हैं जब गांव से थाना महज तीन किलोमीटर की दूरी पर है। दूसरी ओर पूर्वी दिल्ली के एक थाने के देश में टाप 10 पर आने के बाद पुलिस दावा कर रही थी कि चुटकियों में अपराध कम हो सकता है।

यहां गांव में चोरी की घटनाएं गत दो माह से बढ़ गई हैं। हर साल सर्दियों में चोरी की घटनाएं यहां रुकने का नाम ही नहीं लेतीं। ग्रामीण चोरों का पीछा करते हैं तो उन पर फायरिंग तक कर दी जाती है।

4500 की आबादी वाले गांव रानीखेड़ा में लगातार बढ़ती चोरी की घटनाओं ने ग्रामीणों की नींद उड़ा रखी है। इन घटनाओं से बचने के लिए ग्रामीणों ने गांव को चार हिस्सों में बांटकर ठीकरी पहरा देना शुरू कर दिया है। हर घर से एक युवक रात में बारी-बारी से ड्यूटी दे रहा है और गलियों से लेकर गांव की सीमाओं तक निगरानी कर रहा है।

ग्रामीण एवं सेवानिवृत प्रिंसिपल सुनील दत्त भारद्वाज ने बताया कि स्थानीय एमपी, एमएलए चुनाव से पहले आते हैं, उसके बाद कोई दिखाई तक नहीं देता। चोरी की घटनाएं बढ़ीं तो मजबूरी में सीसीटीवी लगाए और अब ठीकरी पहरे का इंतजाम भी करना पड़ा है। पहले चोरी की घटनाओं का पता नहीं चलता था, जब से गांव का इंटरनेट मीडिया का ग्रुप बना है तो चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

गांव के दीपेन भारद्वाज के यहां एक लाख रुपये व सोने की गिन्नी चोरी हुई, कुछ पता नहीं चला। पुलिस को शिकायत दी है। गांव के एमसीडी पार्क से गाड़ी चोरी हो गई और रसूलपुर में पिंटे की छह भैंस चोरी हो गईं। चोरों का कोई सुराग नहीं है। रोजाना कोई न कोई घटना हो ही रही है।

साथ लगती कालोनियों के लोग भी परेशान

रानीखेड़ा के आसपास भाग्य विहार, योगीराज पुरम, मीर विहार और एकता विहार जैसी कालोनियां बसी हुई हैं। इन इलाकों में दस हजार से अधिक आबादी बाहर से आकर बसे लोगों की है। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। यहां नशे का सामान मिलना व अपराध होना सामान्य है। इस संबंध में पुलिस को ग्रामीणों की ओर से कई बार अवगत कराया जा चुका है।

शांत था गांव, दस साल से हुई समस्या

ग्रामीण जसराम ने बताया कि पहले गांव शांत था, यहां 10 साल से समस्या शुरू हुई है। यहां के पार्षद जसबीर को भी संपर्क किया जा चुका है। चोरी की घटनाएं होती रहती हैं, पुलिस सुनवाई नहीं करती। ग्रामीण कृपाल डबास, ओमबीर, विनोद व योगेंद्र ने बताया कि गांव में घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए ठीकरी पहरा लगाने का फैसला लिया गया है। पुलिस से मांग की गई है कि वे गश्त बढ़ाए। क्योंकि चाेरों को रोकने के लिए हमारे पास हथियार नहीं हैं। वे पीछा करने के दौरान फायरिंग तक कर देते हैं।

बोले अधिकारी

पशु चोरी करने वालों का सुराग हमारे पास है। हमने बीट स्टाफ की ड्यूटी लगाने के साथ गांव की पेट्रोलिंग बढ़ाने को कहा है। हम अपराधियों को किसी सूरत में नहीं छोड़ेंगे। पुलिस अपना काम सख्ती से करेगी। यदि ग्रामीणों का सहयोग मिलता है तो इसमें हमें लाभ ही होगा और अपराधियों को जल्द पकड़ने में सहूलियत मिलेगी। - शशांक जायसवाल, डीसीपी

चोरी की घटनाओं के लिए हम पुलिस के संपर्क में हैं। हर साल सर्दियों के आसपास चोरी की समस्या शुरू हो जाती है। ग्रामीणों के साथ मिलकर ठीकरी पहरे का इंतजाम कराया जाता है। गत वर्ष भी पशु चोरों से ग्रामीणों ने मुकाबला किया था। फायरिंग तक हो जाती है। - जसबीर कराला, पूर्व प्रत्याशी एमएलए व मनीषा जसबीर कराला काउंसलर

क्या होता है ठीकरी पहरा

ठीकरी पहरा गांवों या बस्तियों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों द्वारा किया जाने वाला एक पारंपरिक सामुदायिक पहरा या गश्त है। संकट, चोरी, आपदा या महामारी के समय गांव के लोग (विशेषकर युवाओं और बुजुर्गों) द्वारा बारी-बारी से रात या दिन में गांव की चौकसी करना ठीकरी पहरा कहलाता है।

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