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अमेरिका भागा, सबूत मिटाए और फाइलें कीं गायब; 842 करोड़ के मेडिकल घोटाले के मास्टमाइंड राजीव रंगीला की बेल नामंजूर

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:13 PM (IST)

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 842 करोड़ रुपये के चिकित्सा खरीद घोटाले में मुख्य आरोपी राजीव रंगीला की जमानत याचिका खारिज कर दी।

मास्टरमाइंड राजीव रंगीला की बेल नामंजूर।

मास्टरमाइंड राजीव रंगीला की बेल नामंजूर।

HighLights

  1. राजीव रंगीला की 842 करोड़ के मेडिकल घोटाले में जमानत खारिज।

  2. आरोपी ने जांच से जुड़े अहम साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया।

  3. टेंडर में हेरफेर कर अपनी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के 842 करोड़ रुपये के चिकित्सा खरीद घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष न्यायाधीश ने मुख्य आरोपित फार्मा कारोबारी राजीव रंगीला की जमानत याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने कहा कि आरोपित ने जांच से जुड़े अहम साक्ष्य मिटाने के लिए निर्माताओं और अन्य लोगों के साथ वाट्सएप पर हुई बातचीत डिलीट की थी। इसके अलावा वह भारत से अमेरिका भी चला गया था।

विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने कहा कि मामले में दर्ज अधिकारियों के बयानों से पता चलता है कि आरोपित और उसके सहयोगियों ने सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बनाया था। उन्हें अपने निर्देशों के अनुसार काम करने के लिए कहा जाता था। ऐसा नहीं करने पर उन्हें विभागीय कामकाज की व्यवस्था में दरकिनार कर दिया जाता था।

टेंडर ऐसे तैयार हुआ कि मिले रंगीला की कंपनी को फायदा

दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) की ओर से पेश वरिष्ठ लोक अभियोजक कुमार संजय ने आरोप लगाया कि चिकित्सा खरीद के टेंडर इस तरह तैयार किए गए थे, जिससे रंगीला की कंपनियों को फायदा मिल सके।

आरोपित ने दवा निर्माताओं के साथ सांठगांठ कर आपूर्ति की दरें तय कीं और इसके बदले नकद कमीशन लिया। इससे सरकारी खजाने को करीब 842 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अभियोजन के अनुसार, आरोपित की कंपनियों के अनुकूल टेंडर की शर्तें तैयार की गईं। तकनीकी मूल्यांकन की रिपोर्ट भी आरोपित ने तैयार की, जिसे अधिकारियों ने कुछ ही घंटों में मंजूरी दे दी। वहीं, उसकी कंपनियों के बिल एक-दो दिन में पास हो जाते थे, जबकि दूसरे आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान के लिए दो साल से अधिक इंतजार करना पड़ता था।

आरोपी 26 जून को चला गया था अमेरिका

अदालत ने यह भी कहा कि आरोपित 26 जून 2026 के आसपास भारत छोड़कर अमेरिका चला गया था। उसके खिलाफ सात जुलाई को गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। वह 23 सितंबर को भारत लौटा और अगले दिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

यह मामला दिल्ली सरकार के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को दवाएं, टीके और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने वाली केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) से जुड़ा है। एसीबी ने यह भी आरोप लगाया है कि खरीद से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण फाइलें गायब हैं।

मामले की चार्जशीट में तीन सरकारी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें सीपीए के प्रमुख डॉ. रंगा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल और सीपीए के पूर्व उप नियंत्रक लेखा नीरज चोपड़ा शामिल हैं। रंगीला की भूमिका की जांच पूरक आरोपपत्र में किए जाने की संभावना है।

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