यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 25, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
रिंग रेल सेवाः दिल्ली-एनसीआर को मिलेगी प्रदूषण-जाम से निजात
रेल बजट में आज दिल्ली-एनसीआर को बहुत बड़ी सौगात मिली है। दिल्ली में रिंग रेल सेवा को और बेहतर किया ...और पढ़ें

नई दिल्ली। रेल बजट में आज दिल्ली-एनसीआर को बहुत बड़ी सौगात मिली है। दिल्ली में रिंग रेल सेवा को और बेहतर किया जाएगा। रेल मंत्री ने आज संसद में ऐलान किया कि चार महीने में रिंग रेल सेवा के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (ट्रिपल पी) मॉडल लाया जाएगा।
प्रदूषण से चिंतित रेल मंत्री
दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हो रही आबोहवा से रेल मंत्री सुरेश प्रभु भी चिंतित हैं। यही वजह है कि रेल बजट में इसका जिक्र करते हुए उन्होंने दिल्ली की रिंग रेल सेवा को विकसित करने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए ज्वाइंट एक्शन कमेटी बनाई जाएगी जो इस सेवा में आने वाली बाधाओं की पहचान कर उसे दूर करने के लिए सुझाव देगी।
रिंग रेल सेवा का कायाकल्प होने से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में कमी लाने में तो मदद मिलेगी ही दिल्लीवासियों को कहीं आने-जाने के लिए एक और विकल्प उपलब्ध होने से सड़कों पर वाहनों का बोझ कम करने में भी मदद मिलेगी।
राजधानी की हवा में जहरीले तत्वों की मात्र खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है और इसकी गिनती विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में हो रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले दिनों इस पर चिंता जताते हुए दिल्ली की तुलना गैस चैंबर से करते हुए केंद्र व राज्य सरकार को भी फटकार लगाई थी।
स्थिति इस तरह भयावह है कि पिछले दिनों संसद में भी इसकी चर्चा हुई थी और केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था कि प्रदूषण की वजह से दिल्ली में रोजाना 80 लोगों की मौत हो रही है। यह बात और है कि अदालत की टिप्पणी के बाद दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
वाहनों की रोजाना बढ़ रही संख्या को प्रदूषण का बड़ा कारण माना जा रहा है इसलिए सड़कों से वाहनों की संख्या कम करने की कवायद शुरू हुई। दिल्ली सरकार ने ऑड (विषम)-इवेन (विषम) फॉमरूला और कार फ्री डे की शुरुआत की। इन सबके बीच सबसे बड़ी मांग यही है कि जब तक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली मजबूत नहीं होगी तब तक इन सभी योजनाओं को पूरी तरह से लागू करना मुमकिन नहीं है।
दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो की शुरुआत से लोगों को राहत तो मिली है लेकिन अभी यह सेवा सीमित क्षेत्रों में ही उपलब्ध है। इसी तरह से डीटीसी की बसों की संख्या भी जरूरत से आधी है। इस स्थिति में रिंग रेल सेवा फायदेमंद विकल्प साबित हो सकती है। इसे विकसित करने में बहुत खर्च की भी जरूरत नहीं है। ल
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दिल्ली में रिंग रेल सेवा का उपयोग लोकल परिवहन को मजबूत करने के लिए होगा। इस सेवा में तकरीबन 21 स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
माना जा रहा है कि दिल्ली की भोगोलिक स्थिति के हिसाब से रिंग रेल सेवा काफी बड़े हिस्से को अधिकतम सेवाएं दे सकती है। यह न केवल मध्य दिल्ली को आपस में जोड़ेगी, बल्कि इसका फायदा गाजियाबाद, साहिबाबाद, सोनीपत, पानीपत, जींद और पलवल जैसे इलाकों से आने जाने वाले लोग भी ले सकते हैं।
सन 1982 से अपनी सेवाएं दे रही इस रेलवे नेटवर्क में पहले दो-तीन दर्जन ट्रेनें चलती थीं, वहां अब गिन कर केवल पांच गाड़ियां ही चल रही हैं। वह भी लोगों की जानकारी में नहीं होने की वजह से आधी अधूरी सेवाएं ही दे रही हैं। इसके करीब 36 किलोमीटर के रेल नेटवर्क में अवैध कब्जे का बोलबाला है।
संभावित स्टेशन
1.निजामुद्दीन
2.प्रगति मैदान
3.तिलक ब्रिज
4.शिवाजी ब्रिज
5.नई दिल्ली
6.सदर बाजार
7.दिल्ली किशनगंज
8.विवेकानंद पुरी
9.दया बस्ती
10.कीर्ति नगर
11.पटेल नगर
12.नारायणा विहार
13.सरदार पटेल मार्ग
14.शकूर बस्ती
15.चाणक्यपुरी
16.सरोजनी नगर
17.सफदरजंग
18.लोधी कालोनी
19.सेवा नगर
20. लाजपतनगर स्टेशन
21. बरार स्क्वायर
इन स्टेशनों को मिलाकर एक रिंग रेल का नेटवर्क बनाने वाली इस लाइन पर कई बड़े व्यापारिक केंद्र हैं। यही व्यापारिक केंद्र इस नेटवर्क को असफल बनाने के लिए जिम्मेदार भी हैं। जब 90 के दशक में दिल्ली में पर्यावरण अनुकूल वाहनों को बढ़ावा देने की कोशिशें चरम पर थीं।
उस समय इस नेटवर्क की समीक्षा कर इसकी खामियों को दूर करने और इसे सफल बनाने की संभावना तलाशने की भी कोशिश की गई थी। तब इसके लिए ही जेएन सैकिया समिति बनी थी।
