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'उस मासूम की क्या गलती थी?' सत्यानिकेतन हादसे पर राहुल गांधी का सिस्टम से सवाल, कहा- पूरा देश चाहता है जवाबदेही

Published: Sun, 20 Sep 2026 09:28 PM (IST)

दिल्ली के सत्यानिकेतन में पीजी इमारत गिरने से सात छात्रों की मौत के बाद राहुल गांधी ने व्यवस्था की जवाबदेही ...और पढ़ें

सत्य निकेतन हादसे पर बोले राहुल गांधी। फाइल फोटो

सत्य निकेतन हादसे पर बोले राहुल गांधी। फाइल फोटो

HighLights

  1. राहुल गांधी ने सत्यानिकेतन हादसे पर व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

  2. उन्होंने लापरवाही और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया, सुरक्षित छात्रावास की मांग की।

  3. दिल्ली हाई कोर्ट ने घटना पर चिंता जताई, एमसीडी जांच के आदेश दिए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के सत्यानिकेतन में पीजी इमारत गिरने से सात छात्रों की मौत के बाद छात्रावास और निजी पीजी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हादसे को लेकर व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।

रविवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने मृतक छात्र अर्पित झाझ के परिवार का जिक्र किया और पूछा कि आखिर उस मासूम की क्या गलती थी। उन्होंने कहा कि अर्पित का परिवार पर्याप्त और सुरक्षित छात्रावास उपलब्ध नहीं होने के कारण अपने बेटे को असुरक्षित जगह पर रहने के लिए छोड़ने को मजबूर था।

टाला जा सकता था हादसा

राहुल गांधी ने सवाल किया कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो क्या इस हादसे को टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि व्यवस्था की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने सपनों से भरी कई जिंदगियां छीन लीं और उम्मीदों से जुड़े परिवारों को तबाह कर दिया।

उन्होंने छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग करते हुए कहा कि अर्पित का परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा देश जवाबदेही चाहता है। उनका सवाल था कि नए और सुरक्षित छात्रावास क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं और छात्रों को असुरक्षित पीजी में रहने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है।

राहुल गांधी ने सत्यानिकेतन हादसे की जांच की प्रगति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इस मामले में जांच अब तक कहां तक पहुंची है।

क्या हुआ था सत्यानिकेतन में?

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्यानिकेतन में 6 सितंबर को एक इमारत ढह गई थी। इसमें लड़कों के लिए पीजी आवास संचालित हो रहा था। हादसे में सात छात्रों की मौत हुई थी। घटना के बाद पुराने आवासीय भवनों में चल रहे निजी पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी चिंता जताई थी। कोर्ट ने पीजी और निजी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा तथा ऐसे प्रतिष्ठानों के नियमन से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय एमसीडी जांच के आदेश दिए थे।

अदालत ने हादसे को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए कहा था कि मृतक छात्र छोटे शहरों से राजधानी में अपने सपनों और उम्मीदों के साथ आए थे, लेकिन ऐसी घटना ने उनके परिवारों की उम्मीदों को तोड़ दिया।

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