डीयू के 104 साल के इतिहास में पहली बार, लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए कुलगुरु बने प्रो. योगेश सिंह
दिल्ली विश्वविद्यालय के 104 साल के इतिहास में पहली बार प्रो. योगेश सिंह को लगातार दूसरी बार कुलगुरु नियुक्त किया ...और पढ़ें

डीयू के लगातार दूसरी बार कुलगुरु बने प्रो. योगेश सिंह।
HighLights
डीयू के इतिहास में पहली बार लगातार दूसरी बार कुलगुरु।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन और डिजिटल प्रशासन।
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में विश्वविद्यालय की स्थिति में सुधार।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। डीयू के 103 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी कुलगुरु को लगातार दूसरी बार यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रो. योगेश सिंह की पुनर्नियुक्ति केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि उनके पहले कार्यकाल में शिक्षा, शोध, डिजिटल प्रशासन, आधारभूत ढांचे और वैश्विक पहचान के क्षेत्र में हुए व्यापक बदलावों पर भरोसे की मुहर मानी जा रही है।
उनके नेतृत्व में डीयू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) को सबसे प्रभावी ढंग से लागू करने वाले विश्वविद्यालयों में अपनी पहचान बनाई, वहीं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। हालांकि, इस बारे में अभी तक डीयू के पास अभी तक अधिकारिक मेल नहीं आया है।
बहुविषयक शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू किया
प्रो. योगेश सिंह के कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से आगे बढ़ते हुए छात्र-केंद्रित और रोजगारोन्मुखी शिक्षा माडल को अपनाया। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफवाइयूपी), मल्टीपल एंट्री-एग्जिट , अकादमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी), वैल्यू एडेड कोर्स (वीएसी), स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (सीईसी) और बहुविषयक शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू किया गया। इससे विद्यार्थियों को विषय चयन में अधिक लचीलापन और रोजगार के बेहतर अवसर मिले।
प्रोफेसर योगेश सिंह का पहला कार्यकाल 8 अक्टूबर 2021 से शुरू हुआ था। उनका यह कार्यकाल 5 वर्षों का था। इससे पहले वह बड़ौदा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय 2011 से 2014 तक, नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी संस्थान (एनएसयूटी) में 2014 से 2017 तक (निदेशक के रूप में) और दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) में 2017 से 2021 तक कुलगुरु रहे है।

हजारों छात्रों को समयबद्ध और सरल सेवाएं मिलने लगीं
प्रवेश व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम के जरिए दाखिला प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल और छात्र-अनुकूल बनाया गया। परीक्षा, परिणाम, डिग्री, माइग्रेशन और अन्य प्रशासनिक सेवाओं का डिजिटलीकरण होने से हजारों छात्रों को समयबद्ध और सरल सेवाएं मिलने लगीं।
शोध और नवाचार के क्षेत्र में भी डीयू ने नई गति पकड़ी। विश्वविद्यालय ने उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाया। स्टार्टअप, इनोवेशन, पेटेंट, उद्यमिता और रिसर्च कल्चर को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल शुरू की गईं।
बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर
बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया। स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, छात्रावास, खेल सुविधाएं और हरित परिसर विकसित करने की दिशा में कई परियोजनाएं आगे बढ़ीं। विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ परिसर और सतत विकास को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया।
इन प्रयासों का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दिया। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थिति बेहतर हुई। अकादमिक प्रतिष्ठा, शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नियोक्ताओं के बीच बढ़ती विश्वसनीयता ने डीयू को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाया।
प्रो. योगेश सिंह के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) का प्रभावी क्रियान्वयन।
- एफवाइयूपी, एबीसी, वीएसी, एसईसी और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट प्रणाली लागू।
- सीएसएएस के माध्यम से पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल प्रवेश प्रक्रिया।
- परीक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का व्यापक डिजिटलीकरण।
- शोध, स्टार्टअप, इनोवेशन और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा।
- स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और खेल सुविधाओं का विस्तार।
- हरित एवं आधुनिक कैंपस विकास पर विशेष फोकस।
- क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में विश्वविद्यालय की स्थिति में सुधार।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक पहचान को नई मजबूती मिली।
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