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पीएम सूर्य घर योजना में बड़ा बदलाव, घरों के सोलर सिस्टम की बिजली ट्रैक करेगी सरकार; इन्वर्टर से जुड़ेगा डेटा

Published: Mon, 31 Aug 2026 05:53 PM (IST)

केंद्र सरकार ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम से बिजली उत्पादन की निगरानी के लिए नया कदम उठाया है।

अब घरों पर लगे सोलर सिस्टम की बिजली ट्रैक करेगी सरकार। फोटो: एआई जनरेटेड

अब घरों पर लगे सोलर सिस्टम की बिजली ट्रैक करेगी सरकार। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. रूफटॉप सोलर से बिजली उत्पादन की होगी दैनिक निगरानी

  2. इन्वर्टर कंपनियां API से नेशनल पोर्टल पर भेजेंगी डेटा

  3. योजना के वास्तविक प्रभाव और प्रदर्शन का होगा आकलन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छतों पर लगाए जा रहे रूफटॉप सोलर सिस्टम को लेकर केंद्र सरकार ने डेटा मॉनिटरिंग की दिशा में अहम कदम उठाया है।

अब योजना के तहत लगे सोलर सिस्टम से रोजाना कितनी बिजली पैदा हो रही है, इसका रिकॉर्ड जुटाने की व्यवस्था की जा रही है।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने योजना में शामिल इन्वर्टर कंपनियों को सोलर सिस्टम के उत्पादन का डेटा एक समान एपीआई (Application Programming Interface) के माध्यम से नेशनल पोर्टल तक भेजने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ बिजली उत्पादन पर नजर रखना ही नहीं, बल्कि योजना के वास्तविक असर का आकलन करना भी है।

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घर के सोलर सिस्टम का डेटा क्यों जरूरी?

रूफटॉप सोलर सिस्टम से पैदा होने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा घर में ही इस्तेमाल हो जाता है। ऐसे में डिस्कॉम के पास हर घर के सोलर पैनल ने कितनी बिजली बनाई, इसका सटीक आंकड़ा हमेशा उपलब्ध नहीं होता।

इसी वजह से सरकार अब इन सिस्टम से सीधे उत्पादन संबंधी डेटा जुटाना चाहती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि देशभर में लगाए गए सोलर सिस्टम वास्तव में कितनी बिजली पैदा कर रहे हैं।

रोजाना मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर सरकार कई महत्वपूर्ण चीजों का आकलन कर सकेगी, जैसे-

  • पीएम सूर्य घर योजना से वास्तविक बिजली उत्पादन कितना बढ़ा।
  • अलग-अलग राज्यों में रूफटॉप सोलर का प्रदर्शन कैसा है।
  • सब्सिडी के तहत लगाए गए सिस्टम कितनी क्षमता से काम कर रहे हैं।
  • सोलर सिस्टम की वास्तविक उपयोगिता और उत्पादन क्षमता कितनी है।
  • योजना से बिजली के क्षेत्र में कितना वास्तविक योगदान हो रहा है।

नेशनल पोर्टल तक कैसे पहुंचेगा डेटा?

इस पूरी व्यवस्था में सोलर इन्वर्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इन्वर्टर या उससे जुड़े कम्युनिकेशन डिवाइस, जैसे डोंगल या डेटा-लॉगर, सोलर सिस्टम के रोजाना बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड तैयार करेंगे।

इसके बाद इस डेटा को इन्वर्टर के सीरियल नंबर या ऊर्जा मंत्रालय की ओर से निर्धारित यूनिक पहचान संख्या से जोड़ा जाएगा। इससे प्रत्येक सिस्टम के उत्पादन रिकॉर्ड को संबंधित सोलर सिस्टम से लिंक किया जा सकेगा।

इसके बाद इन्वर्टर निर्माता अपनी तकनीकी व्यवस्था के जरिए एपीआई के माध्यम से नेशनल पोर्टल पर डेटा भेजेंगे।

इसका मतलब यह है कि भविष्य में सरकार के पास अलग-अलग घरों में लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम के उत्पादन का अधिक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा।

सरकार घर में खपत को भी देख सकेगी?

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोलर पैनल से बनी पूरी बिजली ग्रिड में नहीं जाती। उसका एक हिस्सा घर में ही इस्तेमाल हो जाता है।

उपलब्ध निर्देशों के मुताबिक फिलहाल फोकस सोलर बिजली उत्पादन के डेटा पर है। यानी सिस्टम ने कितनी बिजली पैदा की, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाना है। घर में उस बिजली में से कितनी खपत हुई, इसकी जानकारी भेजना इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नहीं बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अभी करीब 15 फीसदी इन्वर्टर ऐसे हैं जो एपीआई आधारित डेटा भेजने की क्षमता रखते हैं। बाकी सिस्टम के लिए डोंगल या डेटा-लॉगर जैसे कम्युनिकेशन उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है।

सरकार को इससे क्या फायदा होगा?

पीएम सूर्य घर योजना का लक्ष्य देश में घरेलू रूफटॉप सोलर को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना है। ऐसे में सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि कितने घरों में सोलर सिस्टम लगाए गए। यह जानना भी जरूरी है कि लगाए गए सिस्टम वास्तव में कितनी बिजली पैदा कर रहे हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी राज्य में बड़ी संख्या में सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, लेकिन उनका वास्तविक उत्पादन अनुमान से काफी कम है, तो डेटा के जरिए इसकी पहचान की जा सकती है।

इसी तरह अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन के आंकड़ों से सोलर सिस्टम के प्रदर्शन का तुलनात्मक आकलन भी संभव होगा।

सब्सिडी-उत्पादन का संबंध भी महत्वपूर्ण

पीएम सूर्य घर योजना में सरकार घरेलू रूफटॉप सोलर लगाने के लिए सब्सिडी देती है। ऐसे में उत्पादन का डिजिटल रिकॉर्ड सरकार के लिए यह समझने का एक जरिया बन सकता है कि सब्सिडी के जरिए लगाए गए सिस्टम अपेक्षित तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।

हालांकि, उत्पादन के आधार पर सब्सिडी देने की कोई नई व्यवस्था घोषित नहीं की गई है। मौजूदा जानकारी के अनुसार उत्पादन डेटा जुटाने का उद्देश्य योजना के प्रभाव और सोलर सिस्टम के प्रदर्शन को समझना है।

कितनी सब्सिडी मिलती है?

रिपोर्ट में मौजूदा सब्सिडी क्षमता के अनुसार बताई गई है। इसके तहत-

  • 2 किलोवाट तक के सिस्टम पर 30 हजार रुपये प्रति किलोवाट तक सब्सिडी।
  • 3 किलोवाट तक अतिरिक्त क्षमता पर 18 हजार रुपये प्रति किलोवाट।
  • 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले सिस्टम पर अधिकतम 78 हजार रुपये तक केंद्रीय सब्सिडी।

यहां यह समझना जरूरी है कि उत्पादन डेटा भेजने की नई व्यवस्था और सब्सिडी की पात्रता दो अलग-अलग बातें हैं। केवल उत्पादन की निगरानी शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि सब्सिडी अब सीधे बिजली उत्पादन के आधार पर तय होगी।

आखिर सरकार ने अब यह कदम क्यों उठाया?

पीएम सूर्य घर योजना के विस्तार के साथ देशभर में बड़ी संख्या में घरेलू रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। ऐसे में केवल इंस्टॉलेशन की संख्या के आधार पर योजना की सफलता मापना पर्याप्त नहीं है।

सरकार के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि लगाए गए सोलर सिस्टम वास्तविक तौर पर कितनी बिजली पैदा कर रहे हैं।

इन्वर्टर से मिलने वाले दैनिक उत्पादन डेटा के जरिए सरकार को जमीनी स्तर पर योजना के प्रदर्शन की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिल सकती है। इससे भविष्य में नीति बनाने, राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करने और रूफटॉप सोलर से जुड़े कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है।

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