'भारत विरोधी ताकतों को पहचानें और उन्हें परास्त करें', विजयादशमी पर बोले प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने विजयादशमी के खास मौके पर देश को सर्वोपरि रखने और भारत विरोधी ताकतों को परास्त करने का ...और पढ़ें
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रावण के पुतले का दहन करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जागरण
HighLights
प्रधानमंत्री ने विजयादशमी पर 'राष्ट्र प्रथम' का आह्वान किया।
भारत विरोधी ताकतों को पहचानकर परास्त करने पर जोर दिया।
राम मंदिर, रामराज्य और सांस्कृतिक विरासत पर बात की।
सौरभ पांडेय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विजयादशमी पर देश को सर्वोपरि रखने का आह्वान करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान राम से राष्ट्र और देव से देश की जो संकल्पना सामने रखी गई थी, उसे हम जरूर पूरा करेंगे।
सत्य और मानवता के साथ खड़े रहने वालों की अंत में जीत होती है। देशवासियों को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ एकजुट रहना होगा और देश की एकता, संस्कृति तथा सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों का मुकाबला करना होगा।
बाण चलाकर पुतले का दहन
प्रधानमंत्री सोमवार को आइपी एक्सटेंशन स्थित श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित विजयादशमी उत्सव में पहुंचे थे। यहां उन्होंने बाण चलाकर रावण के पुतले का दहन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, विधायक ओपी शर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
रामलीला से भगवान श्रीराम के आदर्श जीवंत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश का कोना-कोना राममय है। गांव-गांव और शहर-शहर रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखा जा रहा है।
रामलीला केवल त्योहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। भगवान राम ने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन सत्य और नीति का मार्ग कभी नहीं छोड़ा।
रामराज्य सुशासन का आदर्श
उन्होंने वनवास के दौरान निषादराज को गले लगाया और माता शबरी को सम्मान देकर समरसता, प्रेम और करुणा का संदेश दिया।
उनके रामराज्य को आज भी सुशासन का आदर्श माना जाता है, जहां भेदभाव के बजाय न्याय, समान अवसर और जनकल्याण को प्राथमिकता दी जाती है। गरीबों और वंचितों की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए जनता को जनार्दन मानकर आगे बढ़ना है।
भगवान राम के जीवन से सीख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान राम के जीवन से सीख मिलती है कि दृढ़ संकल्प, सामूहिक शक्ति और उपलब्ध संसाधनों के सही इस्तेमाल से कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसी भावना के साथ देश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं। इससे भारत का आत्मसम्मान वापस आ रहा है। यही कारण है कि यूनेस्को ने भारत के पर्व दीवाली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया है। यह हर भारतवासी के लिए सम्मान का विषय है। अंत में भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान का तिलक करते हुए उनकी आरती भी की।
