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66% पायलट बोले- करीब 20 घंटे जागने पर कॉकपिट में आ रही झपकी, FDTL Rules में छूट पर जताई कड़ी आपत्ति

Published: Thu, 29 Oct 2026 11:33 AM (IST)

पायलट संगठनों ने DGCA द्वारा उड़ान ड्यूटी समय सीमाओं FDTL में दी गई छूट की अवधि बढ़ाने पर कड़ी आपत्ति ...और पढ़ें

एयरलाइनों को उड़ान ड्यूटी समय सीमाओं (एफडीटीएल) के नियमों में दी गई विशेष छूट की अवधि का दिख रहा असर। एआई इमेज

एयरलाइनों को उड़ान ड्यूटी समय सीमाओं (एफडीटीएल) के नियमों में दी गई विशेष छूट की अवधि का दिख रहा असर। एआई इमेज

HighLights

  1. DGCA ने FDTL नियमों में छूट 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई।

  2. 66% पायलट कॉकपिट में झपकी आने की बात स्वीकारते हैं।

  3. पायलट संगठनों ने छूट वापस लेने और सुरक्षा ऑडिट की मांग की।

गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। देश के विमानन क्षेत्र में यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा एयरलाइनों को उड़ान ड्यूटी समय सीमाओं (एफडीटीएल) के नियमों में दी गई विशेष छूट की अवधि को 31 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 किए जाने के फैसले पर देशभर के पायलट संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे कड़े पत्र में स्पष्ट किया है कि एयरलाइनों के वाणिज्यिक लाभ के लिए पायलटों की थकान और उड़ान सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को बार-बार नजरअंदाज किया जा रहा है। संगठनों का तर्क है कि अस्थायी राहत के नाम पर दी जाने वाली इन छूटों को लगातार बढ़ाकर स्थाई व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है, जो दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रासंगिक आदेशों का भी उल्लंघन हो सकता है।

पायलट संगठनों का यह विरोध सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के पूर्व के व्यापक वैज्ञानिक विश्लेषणों की भी तस्दीक करता है, जिसमें पायलटों की थकान को विमानन सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। इन अध्ययनों के आधार पर रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि लगातार 17 से 19 घंटे तक जागे रहने के बाद किसी भी व्यक्ति के सोचने-समझने और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता 0.05 प्रतिशत ब्लड अल्कोहल के स्तर जितनी क्षीण हो जाती है।

इसके बावजूद, एयरलाइंस के मौजूदा रोस्टर और उड़ान सीमाओं में मिली ढील के चलते अधिकांश भारतीय पायलट हर दिन इसी स्थिति में उड़ान भरने को विवश हैं। सर्वेक्षणों के अनुसार, देश के लगभग 66 प्रतिशत पायलटों ने काकपिट में अनजाने में झपकी आने की बात स्वीकार की है, जबकि 71 प्रतिशत का मानना है कि अत्यधिक थकान के कारण वे स्वयं को उड़ान संचालन के लिए पूरी तरह सक्षम महसूस नहीं करते।

एफआइपी के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने अपने पत्र में कहा कि देश में पायलटों की कोई ऐसी व्यापक कमी नहीं है जिसके आधार पर संपूर्ण विमानन उद्योग को सुरक्षा मानकों में ढील दी जाए। यदि एयरलाइंस अपनी रोस्टर प्रणाली, क्रू भर्ती और पर्याप्त रिजर्व क्षमता को सही समय पर प्रबंधित करने में विफल रही हैं, तो उसका खामियाजा यात्रियों की सुरक्षा और पायलटों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर नहीं भुगताया जा सकता।

प्रमुख पायलट संगठनों ने मांग की है कि 31 मार्च 2027 तक दी गई इस छूट को तुरंत वापस लिया जाए, एयरलाइनों के मैनपावर डेटा का स्वतंत्र आडिट कराया जाए और थकान की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले पायलटों पर एयरलाइंस द्वारा किए जाने वाले दंडात्मक दबाव को समाप्त कर पारदर्शी सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की जाए।