'दिल्ली पुलिस ने आंखों में धूल झोंकी', MCOCA के बावजूद बेखौफ घूमते रहे बदमाश; कोर्ट ने लगाई फटकार
पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की मकोका मामले में जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं, इसे लापरवाह और आंखों में धूल झोंकने वाला बताया।

HighLights
पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की मकोका जांच पर सवाल उठाए
अदालत ने मकोका आरोपितों की गिरफ्तारी में देरी पर पुलिस को फटकारा
पुलिस आयुक्त को विस्तृत जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। संगठित अपराध के एक गंभीर मामले में पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने पुलिस की कार्यशैली और जांच रिपोर्ट पर तल्ख टिप्पणी करते हुए गंभीर सवाल उठाया है।
पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने बाहरी-उत्तर जिला के पुलिस उपायुक्त की ओर से पेश रिपोर्ट को पूरी तरह से लापरवाह और महज आंखों में धूल झोंकने वाला करार दिया है।
विशेष न्यायाधीश गौरव राव ने कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) जैसी सख्त धाराएं लागू होने के बावजूद मुख्य आरोपित सालों तक बेखौफ घूमते रहे और कई संगीन अपराधों को अंजाम देते रहे, लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी।
दोषी जांच अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
अदालत ने इसके साथ ही आदेश दिया कि इस निर्णय की प्रति दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजने के निर्देश देते हुए कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए और दोषी जांच अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।
अदालत ने पुलिस आयुक्त कार्यालय से जवाब मांगते हुए संबंधित संयुक्त आयुक्त को अगली सुनवाई पर अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। साथ ही 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर पेश होने को भी कहा।
यह मामला सितंबर 2020 में हुई एक प्राथमिकी से जुड़ा है और उस दौरान आरोपित मुकेश उर्फ पुनीत और प्रदीप उर्फ गुरी पर मकोका लगाया गया था।
मकोका के बाद भी दर्ज हुए नए मुकदमे
अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया कि आरोपित मुकेश उर्फ पुनीत पर मकोका दर्ज होने के वक्त उस पर हत्या और प्रयास समेत करीब 20 मामले दर्ज थे।
कानून लागू होने के बाद भी 2021 से 2024 के बीच उस पर हत्या, डकैती और अपहरण के आठ नए मुकदमे दर्ज हुए। इसके बावजूद उसे फरवरी 2026 में जाकर गिरफ्तार किया जा सका, जब केस नए अधिकारी को सौंपा गया।
वहीं, आरोपित प्रदीप उर्फ गुरी पर भी मकोका के बाद लगातार संगीन अपराध करने के आरोप लगे, लेकिन उसे अप्रैल 2026 में गिरफ्तार किया गया। वहीं, तीन आरोपित विनोद, प्रदीप और विकास छह साल बीत जाने के बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
पुलिस के सर्वोत्तम प्रयास पर सवाल
मामले पर एडिशनल डीसीपी ने अपनी दलील में कहा कि पुलिस अधिकारियों ने अपनी तरफ से सर्वोत्तम प्रयास किए हैं।
उक्त जवाब पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि अगर अधिकारियों की नजर में यही उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास है तो अधिकारी मकोका जैसे कड़े कानून की भावना और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील नजर आते हैं।
