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दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में अब 'ड्रोन व GIS' से सर्वे, जानिए किसे और कैसे मिलेगा मालिकाना हक

Published: Wed, 07 Oct 2026 07:17 PM (GMT+05:30)

दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में पीएम-उदय योजना के तहत लोगों को संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए 13 जिलों में विशेष सेल और मुख्यालय शाखाएं स्थापित की जाएंगी।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

HighLights

  1. पीएम-उदय योजना के लिए 13 जिलों में विशेष सेल।

  2. आधुनिक ड्रोन और जीआईएस तकनीक से संपत्ति का सर्वे।

  3. 65 करोड़ रुपये की परियोजना से मिलेगा मालिकाना हक।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। अनधिकृत कॉलोनियों में लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए शुरू की गई पीएम-उदय योजना के क्रियान्वयन को गति देने के लिए सभी 13 जिला मुख्यालयों पर विशेष सेल और मुख्यालय शाखा की स्थापना की जाएगी।

प्रत्येक संपत्ति की आधुनिक तकनीक से सर्वे किया जाएगा जिससे कि किसी तरह की विसंगति नहीं रहे। इससे आवेदकों को अपनी संपत्ति का मालिका हक प्राप्त करने में होने वाली परेशानी दूर होगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में ‘दृष्टि’ (दिल्ली रेवेन्यू ऐंड इमेजिंग सर्वे, स्पेशियल टेक्नोलाजी इनिशिएटिव) के तहत आधुनिक जियोस्पेशियल व जियोग्राफिक इंफारमेशन सिस्टम (जीआइएस) सर्वे और मैपिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए 65 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दे दी है।

सभी 13 जिलों में पीएम उदय सेल शाखा होगी स्थापित

इसके अंतर्गत सभी 13 जिलों में पीएम उदय सेल व मुख्यालय शाखा स्थापित की जाएगी। इससे संपत्तियों के सर्वे और मैपिंग का काम अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से हो सकेगा। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 65 करोड़ रुपये है।

इसमें 52 करोड़ रुपये यानी 80 प्रतिशत राशि आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी विकास निधि (यूडीएफ) से अनुदान के रूप में मिलेगी, जबकि शेष 13 करोड़ रुपये यानी 20 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना को लागू करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की होगी।

पीएम-उदय योजना का उद्देश्य राजधानी की अधिसूचित अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को स्वामित्व का अधिकार प्रदान करना है। इसकी जिम्मेदारी डीडीए, दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग व दिल्ली नगर निगम का सौंपी गई है। इस परियोजना से संपत्ति के स्वामित्व, हस्तांतरण और उससे जुड़े अन्य अधिकारों का लाभ तेजी से मिलेगा।