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'डायबिटीज नहीं है फिर भी मोटापा कर सकता है किडनी को नुकसान', AIIMS की रिसर्च में आया सामने

Published: Sun, 20 Sep 2026 01:14 PM (IST)

एम्स के शोध के अनुसार, डायबिटीज न होने पर भी मोटापा किडनी को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि किडनी के ...और पढ़ें

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान।

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान।

HighLights

  1. मोटापा डायबिटीज के बिना भी किडनी को प्रभावित कर सकता है।

  2. किडनी के आसपास जमा चर्बी उसकी कार्यप्रणाली को बिगाड़ सकती है।

  3. एम्स शोध ने शुरुआती किडनी क्षति के नए संकेत दिए।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। डायबिटीज नहीं है तब भी मोटापे को किडनी के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ने के साथ किडनी के आसपास जमा चर्बी भी बढ़ सकती है और इससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का खतरा रहता है। शुरुआत में इसका असर सामान्य किडनी जांच में स्पष्ट पता नहीं चलता है। एम्स के शोध में मोटापे, मेटाबालिक स्वास्थ्य और किडनी के आसपास जमा चर्बी के बीच ये संबंध सामने आया है।

एम्स के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर (डॉ.) अमनदीप सिंह के नेतृत्व में हुए शोध में 160 वयस्कों पर हुए अध्ययन में मोटापे की अलग-अलग स्थिति वाले लोगों में किडनी के आसपास जमा रेनल साइनस फैट और किडनी से जुड़े बायोमार्कर का आकलन किया गया।

वजन या बीएमआई देखकर किडनी पर मोटापे के प्रभाव का आकलन

मेटाबालिक रूप से अस्वस्थ मोटे लोगों में 77 प्रतिशत में अधिक रेनल साइनस फैट पाया गया, जबकि मेटाबालिक रूप से स्वस्थ मोटे लोगों में यह 55 प्रतिशत था। दो लोगों का बीएमआई समान होने के बावजूद उनके शरीर में चर्बी के जमा होने का स्थान अलग था। कुछ लोगों में किडनी के आसपास अधिक चर्बी जमा हो सकती है। इसलिए केवल वजन या बीएमआई देखकर किडनी पर मोटापे के प्रभाव का आकलन करना सही नहीं है।

मोटापे के साथ रक्तचाप, रक्त शर्करा और किडनी से जुड़े संकेतों पर भी ध्यान देना जरूरी है। शोध में मोटापे की अधिकता के साथ एनजीएएल नामक बायोमार्कर का स्तर बढ़ने के संकेत भी मिले। एनजीएएल किडनी की चोट और सूजन से जुड़ा प्रोटीन है। इसका बढ़ा स्तर किडनी में शुरुआती बदलाव का संकेत दे सकता है।

डायबिटीज के बिना भी किडनी हो सकती है प्रभावित

शोध के अनुसार किडनी में आरंभिक बदलाव केवल डायबिटीज से जुड़े नहीं हैं। मोटापा भी किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाला एक कारक हो सकता है। आरंभिक चरण में किडनी की रक्त को छानने की क्षमता कुछ समय के लिए बढ़ सकती है। ऐसे में सामान्य किडनी फंक्शन जांच सामान्य दिखाई दे सकती है, जबकि किडनी सामान्य से अधिक काम कर रही हो।

डॉ. अमनदीप के अनुसार डायबिटीज नहीं है तो भी बढ़ते वजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वजन नियंत्रित रखना, रक्तचाप और रक्त शर्करा की समय-समय पर जांच कराना तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किडनी की जांच कराना आवश्यक है।

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