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ब्लड ट्रांसफ्यूजन को ‘दवा’ की श्रेणी से अलग करने के लिए PM मोदी को लिखा पत्र, नए कानून की बताई जरूरत

Published: Sat, 12 Sep 2026 10:58 PM (GMT+05:30)

राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछाड़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रक्त सुरक्षा और ट्रांसफ्यूजन के लिए एक अलग राष्ट्रीय कानून बनाने की मांग की है।

देश में रक्त की सुरक्षा और ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया के लिए अभी तक अलग राष्ट्रीय कानून नहीं है। प्रतीकात्मक तस्वीर

देश में रक्त की सुरक्षा और ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया के लिए अभी तक अलग राष्ट्रीय कानून नहीं है। प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. सांसद ने रक्त सुरक्षा हेतु अलग राष्ट्रीय कानून की मांग की।

  2. रक्त को 'दवा' की श्रेणी से हटाकर जैविक संसाधन मानें।

  3. समान सुरक्षा मानक और स्वतंत्र प्राधिकरण स्थापित करने की जरूरत।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मरीजों की जान बचाने के लिए रक्त चढ़ाया जाता है, लेकिन देश में रक्त की सुरक्षा और ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया के लिए अभी तक अलग राष्ट्रीय कानून नहीं है। आज भी रक्त और रक्त घटकों को ड्रग्स एंड काॅस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत ‘दवा’ ही माना जाता है।

विशेषज्ञों और मरीज संगठनों का कहना है कि रक्त सामान्य दवा नहीं, बल्कि मानव जीवन से जुड़ा जैविक संसाधन है। नांदेड़ से राज्यसभा सदस्य डाॅ. अजीत माधवराव गोपछाड़े ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर इसके लिए अलग कानूनी ढांचा बनाने की मांग की है।

रक्त सेवाओं का नियमन कई संस्थाएं अलग-अलग करती हैं। रक्त बैंकों और ट्रांसफ्यूजन का नियमन ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट के तहत होता है। लाइसेंसिंग की जिम्मेदारी सीडीएससीओ और राज्य के औषधि नियंत्रक अधिकारियों के पास है।

एनबीटीसी और एसबीटीसी नीति व मानक तय करती हैं। इसके बावजूद ट्रांसफ्यूजन के बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी के लिए देश में समग्र कानूनी व्यवस्था ही नहीं है। इसे लेकर सांसद डाॅ. गोपछाड़े ने दिसंबर 2025 में राज्यसभा में राष्ट्रीय ब्लड ट्रांसफ्यूजन विधेयक 2025 निजी सदस्य विधेयक के रूप में पेश किया था, जिसे तकनीकी संसाधन समूह को भेजा दिया गया।

फायमा के डाॅ. मनीष जांगड़ा ने कानून का समर्थन करते हुए कहा कि इससे रक्त सुरक्षा और ट्रांसफ्यूजन सेवाओं में एकरूपता आएगी। थैलेसीमिया मरीजों के संगठन भी अलग कानून की मांग करते रहे हैं। अब इस मामले में एक समान सुरक्षा मानक, स्वतंत्र राष्ट्रीय ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्राधिकरण, हेमोविजिलेंस, स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने और उल्लंघन पर स्पष्ट दंड प्रविधान की मांग हो रही है।

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