नई दिल्‍ली, रणविजय कुमार सिंह। World Health Day 2021 आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। अच्छी सेहत खानपान एवं हमारी जीवनशैली पर निर्भर करती है और स्वस्थ शरीर में बसता है स्वस्थ तन व मन। आज विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जा रहा है। इन दिनों एक तरफ कोरोना का संक्रमण तेजी पकड़ रहा है तो दूसरी ओर गर्मी का मौसम सेहत के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। ऐसे में हमें अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहना है। कुछ दिन पहले तक ऐसा लग रहा था कि मानों देश से कोरोना समाप्त हो गया। बाजारों में पहले की तरह बेखौफ चहलकदमी शुरू हो गई थी।

छोटा कस्बा हो या महानगर लोगों की जिंदगी बहुत तेजी से पटरी पर लौटी, लेकिन हम यह भूल गए कि कोरोना का खतरा टला नहीं है। घर से बाहर निकलते वक्त मास्क या गमछा जो चेहरे पर होना चाहिए उसे लोगों ने उतार फेंका। रही सही कसर चुनावी रैलियों व बाजार की बेखौफ भीड़ ने पूरी कर दी। इस वजह से लोगों की सेहत एक बार फिर खतरे में है और कोरोना का बढ़ता मौजूदा संक्रमण पहले से ज्यादा आक्रामक है। इसे रोक पाना अकेले सरकार के लिए संभव नहीं है। अपनी सेहत की कुंजी अपने पास है। कोरोना से लड़ना भी आसान है, बशर्ते हर व्यक्ति यह सुनिश्चित कर ले कि बगैर मास्क के बाहर नहीं निकलना है। कोरोना संक्रमण से बचना लोगों के हाथ में है।

मास्क बचाएगा हर संक्रमण से: मास्क पहनने से कोरोना से तो बचाव होगा ही टीबी सहित कई बीमारियों से भी बचा जा सकता है। प्रदूषण से बचाव में भी मास्क सक्षम है। इसलिए प्रदूषण के कारण फेफड़े की बीमारियों से भी बचाव होगा। लोगों को मास्क को अपने जीवन का हिस्सा बना लेना चाहिए। देश में अभी चुनावी रैलियां बहुत हो रही हैं। इनमें लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। इस भीड़ में हजारों ऐसे लोग होते हैं, जो मास्क नहीं पहने होते हैं। कुछ दिन पहले होली भी थी। लोगों का एक जगह से दूसरी जगह आवागमन भी हो रहा है। इस वजह से कोरोना का संक्रमण तेजी से फैला है। यदि लोग सहयोग नहीं करेंगे और अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तो संक्रमण की इस लहर को थामना यदि असंभव नहीं तो बहुत कठिन तो हो ही जाएगा।

भयावह हो सकती है स्थिति: अब एक दिन में कोरोना के मामलों का आंकड़ा एक लाख को पार कर गया है। दो-तीन दिन में यह आंकड़ा डेढ़ लाख और फिर दो लाख पहुंच सकता है। जिस रफ्तार से कोरोना बढ़ रहा है उससे अप्रैल के आखिर तक या मई के मध्य तक हालात बहुत खतरनाक स्तर पर पहुंच सकते हैं। इसमें वायरस में हुए म्यूटेशन की भी बड़ी भूमिका है। महाराष्ट्र में म्यूटेशन के कारण ही कोरोना बढ़ा है। अन्य राज्यों में भी संक्रमण बढ़ने का यह बड़ा कारण माना जा रहा है। इसका पता लगाने के लिए प्रतिदिन जितने सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग होनी चाहिए वह नहीं हो रही है। इसलिए जीनोम सिक्वेंसिंग को भी बढ़ाने की जरूरत है।

मौका आए तो जरूर लगवाएं वैक्सीन: समस्या यह है कि सड़कों व बाजारों में अब भी बहुत लोग बगैर मास्क देखे जाते हैं। दफ्तरों में भी लोग मास्क नहीं लगा रहे हैं। दफ्तरों में कर्मचारी अलग-अलग इलाके से पहुंचते हैं। कर्मचारियों के मास्क नहीं पहनने से समस्या बढ़ सकती है। टीकाकरण की गति बढ़ाना जरूरी है। टीकाकरण में गति तभी आएगी जब 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका लगेगा। अभी 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को टीका लग रहा है। टीकाकरण के पात्र सभी लोगों को जल्द टीका लगवा लेना चाहिए। इससे कोरोना संक्रमण से बचाव होगा और संक्रमण होने पर भी बीमारी बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होगी। इसलिए प्रतिदिन एक करोड़ के हिसाब से टीकाकरण जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि टीकाकरण के प्रति लोग जागरूक हों। इसके अलावा थोड़ी सख्ती करने की भी जरूरत है। अभी तक टीकाकरण स्वैच्छिक है। मौजूदा हालात को देखते हुए इसे अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। टीका नहीं लेना खुद के साथ-साथ दूसरों की जान जोखिम में डालने के समान है।

मास्क न पहनने पर हो सख्त कार्रवाई: दिल्ली में पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में जब संक्रमण अधिक था तब मास्क नहीं पहनने पर दो हजार रुपये चालान हो रहा था। तब इसका असर भी देखा गया और संक्रमण तुरंत कम हो गया। जनवरी व फरवरी में मामले कम होने के बाद ढिलाई होने पर संक्रमण दोबारा बढ़ गया। इसलिए मास्क नहीं पहनने पर देश भर में सख्ती करनी होगी। इसके अलावा कुछ सीमित लॉकडाउन लगाना चाहिए। पहले की तरह पूर्ण लॉकडाउन तो संभव नहीं है, क्योंकि सरकार लॉकडाउन लगाए या न लगाए उसके लिए दोनों तरफ से मुसीबत है। लॉकडाउन लगाने पर र्आिथक नुकसान का खतरा और लॉकडाउन नहीं लगाने पर संक्रमण बढ़ने का खतरा है। जहां संक्रमण अधिक है, उन स्थानों में सीमित लॉकडाउन कर लोगों की आवाजाही बंद किए जाने से संक्रमण रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यह देखा गया है कि मास्क पहनने से संक्रमण नियंत्रित होता है। इसलिए संक्रमण कम करना बहुत आसान और अपने हाथ में है।

अल्कोहल का न करें सेवन: अल्कोहल के सेवन से हमारी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसके अलावा लिवर की बीमारी सहित कई तरह के रोग होते हैं। इसलिए अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए। खाने में नमक का सेवन कम करना चाहिए। ब्लड प्रेशर की बीमारी होने का एक कारण अधिक मात्रा में नमक का इस्तेमाल भी माना गया है। तली हुई चीजों का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करना चाहिए। इससे भी सेहत को नुकसान पहुंचता है।

मजबूत रखें प्रतिरोधक क्षमता: लोग खानपान में पौष्टिक व सात्विक आहार लें और नियमित योग करें। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहती है साथ ही बीमार होने की आशंका कम हो जाती है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए काढ़ा पी सकते हैं। इसके अलावा आयुर्वेद के अन्य उपायों को भी डॉक्टर की सलाह से अपना सकते हैं। दूध में हल्दी डालकर इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। प्रतिदिन योग, ध्यान व व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। खराब जीवनशैली के कारण मधुमेह व ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां होने लगती हैं।

एक अनुमान के अनुसार देश में करीब सात करोड़ 70 लाख लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। ब्लड प्रेशर की समस्या युवाओं में भी देखी जा रही है। इसका बड़ा कारण महानगरों में गलत खानपान और शारीरिक मेहनत नहीं करना है। इसलिए प्रतिदिन लगभग एक घंटा योग, ध्यान, व्यायाम व पैदल चलना जरूरी है। इससे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। यदि ये बीमारियां हैं तो उन्हें नियंत्रित रखा जा सकता है। मधुमेह व ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए कोरोना संक्रमण ज्यादा खतरनाक है। इसलिए खुद को स्वस्थ रखना बहळ्त जरूरी है।

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