नई दिल्ली (जेएनएन)। दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने ऐसी एजेंसी को इलेक्टिक बसें खरीदने के लिए सलाहकार नियुक्त किया है, जिसे इलेक्टिक बसों के बारे में कोई अनुभव ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग ने दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड (डिम्ट्स) को सलाहकार बनाने पर आपत्ति जताई थी। परिवहन विभाग ने कहा था कि डिम्ट्स के पास इलेक्टिक बसों के परिचालन का अनुभव नहीं है, इसलिए इसे सलाहकार बनाने का फैसला गलत होगा, मगर सरकार ने सीसीटीवी कैमरे बंद कराकर कैबिनेट की बैठक की और एक हजार इलेक्टिक बसें खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

आप सरकार ने एक हजार इलेक्टिक बसें खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए 10 जुलाई को कैबिनेट की बैठक की थी। सूत्रों का कहना है कि डिम्ट्स को सलाहकार नियुक्त किए जाने के सरकार के प्रस्ताव का परिवहन आयुक्त वर्षा जोशी ने विरोध किया था। इसे लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और जोशी के बीच नोकझोंक भी हुई थी। जिसके बाद बैठक स्थगित कर दी गई थी, मगर 11 जुलाई को फिर से कैबिनेट की बैठक बुलाई गई।

बैठक शुरू होने से पहले सीसीटीवी कैमरों को मुख्यमंत्री के आदेश पर बंद कर दिया गया, जबकि मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट की घटना के बाद केजरीवाल ने ही फैसला लिया था कि कैबिनेट की सभी बैठकें सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होंगी। बैठक में एक बार फिर इलेक्टिक बसें खरीदने का प्रस्ताव लाया गया, मगर अधिकारियों ने इलेक्टिक बसों के लिए डिम्ट्स को सलाहकार एजेंसी बनाए जाने का फिर विरोध किया, जिसे कैबिनेट ने दरकिनार किया।

कुछ माह पहले सरकार ने जब इलेक्टिक बसें खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया था तो तत्कालीन वित्त सचिव एसएन सहाय ने कहा था कि इसपर कोई काम शुरू किए जाने से पहले योजना की डीपीआर यानी डिटेल प्रोजक्ट रिपोर्ट तैयार की जाए। ताकि पता चल सके कि योजना दिल्ली के लिए ठीक है या नहीं। इसके बाद कुछ समय के लिए इस पर काम रुक गया था। सहाय के पद से हटने के बाद रेनू शर्मा वित्त विभाग की सचिव बनीं तो उन्होंने भी डीपीआर तैयार करने को कहा। फाइल जब योजना विभाग में गई तो इस विभाग ने भी पहले डीपीआर तैयार करने को कहा था।

बढ़ेगा एलजी-सरकार का विवाद

गुरुवार को सरकार ने एलजी द्वारा वकीलों की रद की गई नियुक्ति को बहाल कर वेतन व भुगतान की स्वीकृति दी थी, लेकिन किसी कारण से शुक्रवार को भुगतान नहीं हो पाया। इस पर केजरीवाल ने कहा कि केस हार जाने के बाद क्या केंद्र को अधिकार है कि वह अधिकारियों पर दबाव डालकर दिल्ली के सरकारी वकीलों को भुगतान रोक दे।

25 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान

योजना के तहत दिल्ली के लिए बिजली से चलने वाली एक हजार बसें खरीदी जानी हैं। इस पर 25 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। डिम्ट्स को चूंकि योजना का सलाहकार बनाया गया है, इसलिए उसे सवा दो करोड़ की राशि दी जाएगी। डिम्ट्स को तीन माह में अपनी रिपोर्ट सरकार को देनी है।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का कहना है कि आप सरकार द्वारा एक बड़ा घोटाला करने का प्रयास किया जा रहा है। आखिर ऐसा क्या कारण है कि परिवहन विभाग की आपत्ति के बाद भी केजरीवाल ने उस डिम्ट्स को योजना के लिए बिना टेंडर के सलाहकार नियुक्त कर दिया, जिसे इलेक्टिक बसों के बारे में कोई अनुभव नहीं है। केजरीवाल सरकार की ऐसी क्या मजबूरी थी कि योजना के लिए डीपीआर तक नहीं बनाई गई, जबकि दो विभागों ने केजरीवाल सरकार को डीपीआर बनाने की सलाह दी थी। सवाल यह भी है कि कैबिनेट बैठक वाले कमरे के सीसीटीवी कैमरे क्यों बंद किए गए। 

Posted By: JP Yadav