नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। सर गंगाराम अस्पताल में दो मरीजों का मंगलवार को मोनोक्लोनल ऐंटीबाडी थेरेपी से इलाज किया गया। दोनों मरीजों को इससे बहुत जल्दी फायदा हुआ। थेरेपी के 12 घंटे बाद ही दोनों को अस्पताल से छुट्टी दे गई। मरीजों का इलाज करने वाली डाक्टर पूजा खोसला ने बताया कि पहला मरीज 36 वर्षीय स्वास्थ्य कर्मी था जो तेज बुखार, कफ और कमजोरी से पीड़ित था। उसे बीमार होने के छठे दिन मोनोक्लोनल ऐंटीबाडी थेरेपी दी गई। इससे काफी तेजी से उसकी तबीयत में सुधार हुआ। 12 घंटे बाद ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। साथ ही दूसरे मरीज 80 वर्षीय आरके राजदान को पहले से ही डायबिटीज और हायपरटेंशन की बीमारी थी। वह तेज बुखार और कफ से परेशान थे।

हालांकि, उनका आक्सीजन स्तर 95 फीसद से ऊपर था। सीटी स्कैन में उन्हें हल्के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। बीमार होने के पांचवें दिन राजदान को मोनोक्लोनल ऐंटीबाडी थेरेपी दी गई। राजदान को भी 12 घंटे बाद ही तबीयत में सुधार होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डाक्टर पूजा खोसला ने कहा कि आने वाले समय में मोनोक्लोनल एंटीबाडी सही समय पर इस्तेमाल होने से गेम चेंजर साबित हो सकती है। साथ ही यह उच्च जोखिम वाले लोगों को अस्पताल में भर्ती होने से भी बचाती है। इसके इस्तेमाल से स्टेरायड आदि की आवश्यकता न पड़ने से म्यूकरमायकोसिस और दूसरे बैक्टीरियल व वायरल संक्रमण जैसी घातक बीमारियों से बचने में भी मदद मिलती है।

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