नई दिल्ली [राहुल मानव]। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर एवं छात्रों ने ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार किया है, जिसकी मदद से दृष्टिबाधितों को रोशनी मिल सकेगी। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण एक चिप की तरफ होगा, जिसमें तीन मिलीमीटर का एंटीना भी लगेगा। एंटीना चिप जितना ही छोटा होगा।

जेएनयू के स्कूल ऑफ कंप्यूटेशनल एंड इंटीग्रेटिव साइंसेज के प्रोफेसर बीएन कनोजिया, पीएचडी स्कॉलर विक्रांत केम ने यह उपकरण तैयार किया है। कनाडा के अलबेर्टा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर राम बाबू करुमुदी ने भी इसमें अपना योगदान दिया है। उनके इस शोध कार्य को इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के साइंस जर्नल इलेक्ट्रॉनिक्स लेटर्स ने प्रकाशित किया है। यह जर्नल ब्रिटेन का है।

विक्रांत ने बताया कि आंखों के अंदर आइबॉल में इस इस छोटे उपकरण को फिट किया जाएगा। आइबॉल में कोशिकाओं की परत होती है, जिनमें से एक परत फोटो रिसेप्टर कोशिकाओं की होती है। फोटो रिसेप्टर कोशिका बाहर से आ रही रोशनी को स्वीकार करती है और इसी के जरिये इंसान को बाहर के हालात की तस्वीर नजर आती है। दृष्टिबाधित लोगों में फोटो रिसेप्टर कोशिकाएं खराब हो जाती हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण की मदद से ऐसे लोगों को रोशनी मिल सकेगी। ऐसे करेगा काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण में एंटीना के साथ एक छोटा सर्किट भी लगाया गया है। यह बाहर की तस्वीरों को सिग्नल के जरिये एंटीना तक पहुंचाएगा।

एंटीना से सिग्नल वापस सर्किट में जाएंगे और सर्किट की मदद से सिग्नल मस्तिष्क तक पहुंचेंगे। चश्मे के कैमरे से आइबॉल की चिप तक पहुंचेंगे सिग्नल विक्रांत ने बताया कि हम दृष्टिबाधित लोगों को चश्मा देंगे। चश्मे के ऊपर कैमरा लगा होगा। कैमरे के साथ एक अन्य एंटीना लगाया गया है। इस एंटीना में भी अलग से सर्किट रहेगा।

कैमरे के अंदर एंटीना और सर्किट की बदौलत बाहर के वातावरण की तस्वीरों की इमेज रिकॉर्ड हो सकेगी। इस पूरी प्रणाली के बाद आंख की आइबॉल के अंदर लगी चिप के एंटीना में चश्मे के एंटीना से सिग्नल पहुंचेंगे। यह प्रणाली वायरलेस है।

एंटीना जिंदगी भर तक चलने में है सक्षम पीएचडी स्कॉलर विक्रांत ने कहा कि हम उपकरण की चिप को और बेहतर बना रहे हैं। उपकरण का एंटीना जिंदगी भर तक चलने में सक्षम है। हम कोशिश कर रहे हैं एंटीना में वायरलेस माध्यम से ऊर्जा पहुंचाई जाए।