नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। Tablighi Jamaat case: देश में कोरोना को लेकर बड़ा संकट खड़ा करने वाले 6 विदेशी जमातियों की कोरोना संक्रमण से दिल्ली में मौत हो गई थी। कोरोना से संक्रमित होने पर इन्हें दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। अलग-अलग कब्रिस्तान में उनके शवों को दफना दिया गया। 34 देशों से जमात में शामिल होने आए अधिकतर विदेशी कोरोना से संक्रमित हो गए थे। उन्हीं से दूसरों में संक्रमण फैला। दिल्ली-एनसीआर में जमातियों की वजह से संक्रमण फैला। क्राइम ब्रांच ने 85 विदेशी जमातियों के खिलाफ दायर आरोप पत्र में इन तत्थों का विस्तार से जिक्र किया है।

आरोप पत्र में कहा गया है कि मार्च महीने में भारत में कोरोना का संक्रमण फैलना शुरू हो गया था। सरकार ने सभी तरह के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया था। बावजूद इसके मरकज के प्रमुख मौलाना मुहम्मद साद ने जानबूझ कर देश में कोरोना का संक्रमण फैलाने के लिए मरकज में 13-15 मार्च के बीच तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।

कार्यक्रम में दस हजार से अधिक जमातियों ने भाग लिया था। 27 मार्च को तेलंगाना पुलिस से दिल्ली पुलिस को जब यह सूचना मिली कि जमात में शामिल हुए चार लोगों की कोरोना से मौत हो गई तब दिल्ली पुलिस के होश उड़ गए थे। मरकज को खाली कराने के दौरान उसमें 3200 जमाती थे। एफआरआरओ, आइबी व दिल्ली सरकार ने भी अपने अपने स्तर पर विदेशी जमातियों का पता लगाना शुरू किया था। इन्हें 500 विदेशी जमातियों के बारे में ही पता चल पाया था।

विशेष आयुक्त क्राइम ब्रांच प्रवीर रंजन व डीसीपी जॉय टिर्की के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सतीश कुमार की एक बड़ी टीम ने कड़ी मेहनत पर सभी को नोटिस जारी कर पूछताछ की। पुलिस ईद खत्म होने का इंतजार कर रही थी। जाहिर है कि अब इस मामले में तेजी आएगी। 

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