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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय से जुड़े स्टार्टअप में तैयार सॉफ्टवेयर किसी भी आयु वर्ग के लिए हो सकता प्रयोग

आप अपने बच्चे या फिर कोई कंपनी अपने कर्मचारी की एकाग्रता स्तर और बौद्धिक व तार्किक क्षमता जानना चाहे तो अब यह मुमकिन है। इससे आगे सुधार क्षमा पर काम किया जा सकेगा। दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) की छात्रा निधि ने ऐसा अनूठा सॉफ्टवेयर तैयार किया है जो किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता का आकलन करेगा।

By dharmendra yadav Edited By: Geetarjun Published: Sun, 09 Jun 2024 07:53 PM (IST)Updated: Sun, 09 Jun 2024 07:53 PM (IST)
साफ्टवेयर के बारे में बताते हुए नीमा एआइ स्टार्ट-अप की सीईओ निधि।

धर्मेंद्र यादव, बाहरी दिल्ली। आप अपने बच्चे, या फिर कोई कंपनी अपने कर्मचारी की एकाग्रता स्तर और बौद्धिक व तार्किक क्षमता जानना चाहे तो अब यह मुमकिन है। इससे आगे सुधार क्षमा पर काम किया जा सकेगा। दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू)  की छात्रा निधि ने ऐसा अनूठा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता का आकलन करेगा और यह भी बताएगा कि क्षमताओं में कमी कहां है और इन्हें कैसे सुधारा जा सकता है।

यह सॉफ्टवेयर ऑटिज्म, अटेंशन डिफिशिंएट हाईपर एक्टिव डिसआर्डर (एडीएचडी),डिसलेक्सिया से ग्रस्त बच्चों की पढ़ाई और सीखने की क्षमता में सुधार में उम्मीद भी जगा रहा है। निधि के इस स्टार्ट-अप को डीटीयू के अलावा आईआईएम बेंगलुरु व गुजरात सरकार ने अनुदान दिया है।

अपनी टीम के साथ नीमा एआइ स्टार्ट-अप की सीइओ निधि (मध्य में)

दिल्ली में कालकाजी एक्सटेंशन में रहने वाली निधि ने 'नीमा एआई' के नाम से बनाए इस स्टार्ट-अप की शुरुआत फरवरी 2022 में की थी। सालभर के भीतर निधि के स्टार्ट-अप की व्यावसायिक क्षेत्र में काफी चर्चा है। निधि का कहना है कि इस समय उनका स्टार्ट-अप केवल बच्चों पर ही के लिए ही है, लेकिन भविष्य में भर्ती प्रक्रिया (प्लेसमेंट/हायरिंग) में भी इस सॉफ्टवेयर के उपयोग करने की योजना है।

शार्क टैंक शो में निधि (मध्य में) को चेक देते हुए महिला उद्यमी विनीता सिंह व नमिता थापर

फिलहाल पूरी टीम बच्चों को लेकर काम कर रही है। स्टार्ट-अप की फाउंडर निधि ने बताया कि उनके सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑटिज्म, एडीएचडी, डिसलेक्सिया से ग्रस्त बच्चों के पढ़ने, सोचने और सीखने की क्षमता व गुंजाइश के बारे में भी बताएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके सॉफ्टवेयर का ऐसे बच्चों के लिए इलाज के तौर पर उपकरण से कोई लेना-देना नहीं है।

डीटीयू इनक्लूसिव टेक्नोलाजी बिजनेस इंक्यूबेटर (आईटीबीआई) के चीफ ऑपरेटिंग आफिसर अमित सिंह राठौर ने बताया कि डीटीयू की महिला स्टार्ट-अप में आगे आ रही हैं, अच्छा लगता है। डीटीयू हर महिला की मदद के लिए तैयार है। आईटीबीआई की ओर से गत मार्च महीने में निधि के स्टार्ट-अप को पांच लाख रुपये अनुदान के लिए चुना गया है। यह राशि कुछ समय बाद उन्हें दी जाएगी।

सॉफ्टवेयर ऐसे करता है काम

हेड बैंड के माध्यम से ब्रेन का डाटा लेने के बाद नीमा एआइ का सॉफ्टवेयर डाटा का विश्लेषण करता है। डाटा का विश्लेषण कर यह सॉफ्टवेयर व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता, स्मरण शक्ति और सोचने के तरीके के बारे में जानकारी देता है। जांच के बाद यह भी पता लग सकता है कि आखिर कमी कहां है। यह सॉफ्टवेयर ब्रेन के पैट्रर्न को समझेगा। या यूं कह सकते हैं कि ब्रेन मेपिंग करता है।

पांच मिनट की जांच के बाद किसी व्यक्ति की संज्ञानात्मक क्षमता (काग्निटिव एबिलिटी) तुरंत स्क्रीन पर आ जाती है। निधि बताती हैं कि डीटीयू में इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक की पढ़ाई के दौरान वर्ष 2017 में इस तरह का उपकरण बनाने पर शोध शुरू किया था।

दिल्ली, मुंबई व बेंगलुरु के स्कूलों ने खरीदा सॉफ्टवेयर

स्टार्ट-अप नीमा एआइ की सीइओ निधि ने बताया कि स्कूल स्तर पर बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता (काग्निटिव एबिलिटी) के बारे में पता लगाया जा सके और सुधार किया जा सके, इसलिए कंपनी ने अपना सॉफ्टवेयर स्कूलों को बिक्री करने का फैसला लिया है। अभी तक दिल्ली के तीन, मुंबई व बेंगलुरु के एक-एक स्कूल ने नीमा एआई सॉफ्टवेयर खरीदा है।

बकौल निधि उनके यहां बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्‍चों की एकाग्रता के स्तर और तार्किक क्षमता की जांच के लिए आ रहे हैं। बच्चों में आत्मविश्वास की कमी व एकाग्रता की समस्‍या को लेकर अभिभावक उनके पास आ रहे हैं। हर महीने औसतन तीन सौ अभिभावक उन तक पहुंच रहे हैं।

शार्क टैंक शो में दो कंपनी ने निधि के स्टार्ट-अप में किया निवेश

शार्क टैंक शो में निधि के स्टार्ट-अप को खूब सराहना मिली। मार्च माह में शार्क टैंक शो में निधि ने अपने स्टार्ट-अप को प्रस्तुत किया। इस शो में नामी महिला व्यवसायी विनीता सिंह व नमिता थापर ने निधि के स्टार्ट-अप में 40 लाख रुपये का निवेश किया। निधि ने बताया कि उनके स्टार्ट-अप को गुजरात सरकार ने नौ लाख रुपये और आईआईएम बेंगलुरु ने एक लाख रुपये का अनुदान दिया है।


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