नई दिल्ली [भगवान झा]। जिस भाई ने रूंधे गले से बहन को डोली में बिठाकर जिंदगी के नए सफर पर ससुराल विदा किया हो, उस भाई पर यह ऐतबार करना मुश्किल होता है कि वह अपनी बहन की दुनिया को ही उजाड़ देगा। लेकिन ऐसा होता है। ऐसा हुआ भी है। बृहस्पतिवार को बहादुरगढ़ में अपने पति व बच्चों के घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही सीता को क्या पता था कि उसकी मांग से सिंदूर मिटाने में उसी के सगे भाई शिद्दत से जुटे हुए हैं। सीता के पति आशु खयाला इलाके में अपने बच्चों को लेने ससुराल आए थे, लेकिन मामूली बात पर हुई कहासुनी के बाद आशु के तीन सालों ने पहले रस्सी से बांधकर जबर्दस्त पिटाई की और बाद में मुंह पर कंबल रखकर तब तक दबाए रखा जबतक की आशु की सांस बंद न हो जाए। मामले में पुलिस ने विकास व उसके नाबालिग भाई को पकड़ लिया है, जबकि तीसरे आरोपित लल्लन की तलाश में दबिश दे रही है।

जानकारी के मुताबिक आशु अपनी पत्नी सीता के साथ बहादुरगढ़ इलाके में रहते थे। पति- पत्नी एक फैक्ट्री में काम करते थे, इस कारण इनके बच्चे खयाला इलाके में मामा के घर पर रहते थे। बृहस्पतिवार को आशु अपनी बेटी रिया व बेटा दक्ष को लेने के लिए ससुराल आए। आरोप है कि इस दौरान आशु ने शराब पी रखी थी। बातों ही बातों में बच्चों को बहादुरगढ़ ले जाने की बात को लेकर कहासुनी होने लगी।

इसके बाद आशु घर से बाहर निकलकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे। बात बढ़ती देख विकास व उसके नाबालिग भाई ने अपने बड़े भाई लल्लन को बुलाया और आशु के हाथ-पैर को रस्सी से बांधकर पहले जबर्दस्त पिटाई की। जब इससे भी तीनों भाइयों का मन नहीं भरा ताे आशु के मुंह पर कंबल रख दिया और जबतक मौत नहीं हुई तबतक दबाए रखा। इसके बाद तीनों भाइयों ने मिलकर शव को दूसरे कमरे में फेंक दिया।

खुद का बचाव करने के लिए विकास ने शुक्रवार सुबह रघुबीर नगर इलाके में ही रहने वाली आशु की बहन मीरा को फोन कर घटना की जानकारी दी। उसने मीरा को बताया कि आशु हमारे पास आया था और रात में अचानक बेहोश हो गया। उसे अबतक होश नहीं आया है। इसके बाद मीरा के पति वीरपाल मौके पर पहुंचे जहां आशु मृत पड़े थे। वीरपाल ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि आशु के चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान के साथ ही हाथ और पांव पर रस्सी से बांधे जाने के भी निशान हैं। छानबीन के दौरान विकास और उसकी पत्नी ने पुलिस को बरगलाने की कोशिश की। विकास आशु के बीमार रहने सहित अन्य बातें कर पुलिस को उलझाने लगा, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर अपना गुनाह कुबूल कर लिया।

आशु की पत्नी सीता ने बताया कि पहले रघुबीर नगर इलाके में ही कार्य करते थे। तीन महीने पहले बहादुरगढ़ स्थित एक फैक्ट्री में काम मिला तो दोनों वहीं जाकर रहने लगे। मकर संक्रांति को देखते हुए बच्चों को लेने के लिए आशु यहां आया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि अगर किसी बात को लेकर जीजा-साले में मनमुटाव था तो बातचीत से इसका समाधान हो सकता था। देर रात या फिर आशु के शराब पीने के कारण बच्चों को नहीं जाने दे रहे थे तो वे आशु को समझाते या फिर कोई एक भाई आशु के साथ बहादुरगढ़ बच्चों को लेकर चले जाते, लेकिन इन्होंने तो हत्या ही कर दी। 

Edited By: Prateek Kumar