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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

निगम चुनाव से पहले दिल्ली के पार्षदों की चौंकाने वाली प्रदर्शन रिपोर्ट आई सामने, आप भी जानें

By Vinay Kumar TiwariEdited By:
Published: Fri, 29 Oct 2021 12:23 PM (IST)

MCD Elections 2022 किसी भी पार्षद ने ए श्रेणी (80 से 100 फीसद के बीच) का प्रदर्शन नहीं किया है। ...और पढ़ें

तीनों नगर निगमों के पार्षद उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं थे।
तीनों नगर निगमों के पार्षद उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं थे।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोनाकाल में जब लोगों को जनप्रतिनिधियों की जरूरत थी, तब तीनों नगर निगमों के पार्षद उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं थे। ऐसे में जब अगले साल निगमों के चुनाव होने हैं, पार्षदों के प्रदर्शन में आई गिरावट की रिपोर्ट पार्टियों की चिंता बढ़ाने वाली है। किसी भी पार्षद ने ए श्रेणी (80 से 100 फीसद के बीच) का प्रदर्शन नहीं किया है। सर्वाधिक 86 पार्षद सी श्रेणी (70 फीसद से कम लेकिन 60 फीसद से अधिक या बराबर) में आए हैं।

इसी तरह 73 पार्षदों का प्रदर्शन फिसड्डी डी श्रेणी (60 फीसद से कम लेकिन 50 फीसद से अधिक या बराबर) का रहा है। यह आंकड़े प्रजा फाउंडेशन के उस समेकित रिपोर्ट कार्ड में है, जो उसने वर्ष 2017-18 से वर्ष 2020-21 तक 265 पार्षदों के प्रदर्शन के डेटा के आधार पर तैयार किया है, जिसके मुताबिक तीनों निगमों के केवल नौ पार्षदों का प्रदर्शन 74.33 से 79.98 फीसद के बीच रहा है। इनमें भाजपा के छह, आम आदमी पार्टी (आप) के दो तथा कांग्रेस पार्टी के महज एक पार्षद शामिल हैं।

प्रजा फाउंडेशन के संस्थापक और मैनेजिंग ट्रस्टी निताई मेहता ने बताया कि राजधानी के पार्षदों का समग्र प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। उत्तरी निगम (एनडीएमसी) के पार्षदों का कुल औसत स्कोर वर्ष 2017-18 के 60.50 फीसद से गिरकर 2020-21 में 57.92 फीसद हो गया है। इसी तरह इस अवधि में दक्षिणी निगम (एसडीएमसी) का 60.48 फीसद से गिरकर 56.85 फीसद तथा पूर्वी नगर निगम (इडीएमसी) का 61.57 फीसदी से गिरकर 54.40} हो गया।

फाउंडेशन के निदेशक मिलिंद म्हस्के ने डेटा के आधार पर बताया कि विभिन्न बैठकों में पार्षदों की उपस्थिति भी धीरे-धीरे कम हो गई है। एनडीएमसी में उपस्थिति वर्ष 2017-18 में 78.81 फीसद से घटकर वर्ष 2019-20 में 73.38 फीसद हो गई है। इसी तरह एसडीएमसी में इस अवधि में 79.62 फीसद से घटकर 72.37 फीसद तथा इडीएमसी में 82.34 फीसद से घटकर पार्षदों की मौजूदगी 72.64 फीसद पर आ गई।

चिंताजनक बात यह कि नागरिकों की शिकायतों की तुलना में मुद्दों को उठाने में पार्षदों द्वारा प्राप्त औसत स्कोर केवल 38.26 फीसद है, वहीं निगमों में उठे कुल 62,184 मुद्दों में आधे से अधिक 32,356 अकेले 69 पार्षदों ने ही उठाए। मतलब जनहित के मुद्दो को उठाने में भी सक्रियता काफी कम पार्षदों की रहीं। कार्यालय में चार साल पूरे करने के बाद तीन नगर निगम में एक भी पार्षद ने मुद्दों की गुणवत्ता में ’ए’ (100 से 80 के बीच) या ’बी’ (80 से कम लेकिन 70 फीसद से अधिक या उसके बराबर) श्रेणी हासिल नहीं किया है।