नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए आंदोलकारियों के लिए आंदोलनजीवी शब्द का इस्तेमाल किया था। वहीं,  आंदोलनजीवियों पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर शिव कुमार कक्काजी ने कहा कि राममनोहर लोहिया ने कहा था कि जिस दिन सड़कें सुनसान हो जाएंगी उस दिन संसद खामोश हो जाएगी। लोकतंत्र में सत्याग्रह, आंदोलन जिंदा कौम करती है और इन्होंने ही देश की समय-समय पर दिशा और दशा बदलने का काम किया है। इन्हें अपनी पहचान की जरूरत नहीं है। शायराना अंदाज में कक्काजी बोले- ‘मुझे बंद करो या मेरी जुबां करो, मेरे ख्यालों को बेड़ियां पहना नहीं सकते।’

देश के नामी किसान नेताओं में शुमार शिव कुमार कक्काजी के अनुसार पिछले सात साल के दौरान विपक्ष बहुत ही कमजोर रहा, इसके चलते आंदोलन काफी कम हुए। ऐसी स्थिति में आंदोलन पर टिप्पणी को वे उचित नहीं मानते। किसान नेता शिव कुमार शर्मा कक्काजी ने कहा कि किसान आंदोलन सिर्फ और सिर्फ तीन कृषि कानूनों को रद करवाने के लिए हो रहा है। इसके मंच को अभी तक संयुक्त किसान मोर्चा ने किसी भी विपक्षी दल के साथ साझा नहीं किया है। आगे भी यह आंदोलन पूरी तरह गैर राजनीतिक रहेगा। किसान खुद अपने संसाधनों से सड़कों पर है।

वहीं, प्रधानमंत्री की ओर से बातचीत की अपील पर किसान नेता डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि उन्होंने कभी बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया। केंद्र सरकार ने जब भी बुलाया, वे बातचीत के लिए गए और आगे भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगें आज भी वही हैं। दर्शनपाल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार एमएसपी को लेकर खुलकर कोई बात नहीं कर रही है। हम फसलों की खरीद पर एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून की बात कर रहे हैं। सरकार उनकी मांगें मान लें, हम सभी अपने-अपने घर चले जाएंगे।

Edited By: JP Yadav