नई दिल्ली, जेएनएन। यौन शोषण का झूठा मुकदमा करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महिला पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसकी चुनौती याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा महिला को जुर्माना धनराशि चार सप्ताह के अंदर दिल्ली हाई कोर्ट एडवोकेट वेलफेयर ट्रस्ट में जमा करानी होगी। महिला ने आरोप लगाया था कि वरिष्ठ अधिकारी ने उसका यौन शोषण किया है और आंतरिक शिकायत समिति (आइसीसी) ने उन्हें संदेह का लाभ दिया है।

न्यायमूर्ति जेआर मिधा ने कहा कि 2012 के आइसीसी के फैसले को चुनौती देने वाली महिला की याचिका का कोई आधार नहीं है। याचिका में महिला ने मांग की थी कि उसके संस्थान द्वारा एक स्वतंत्र विभागीय जांच के निर्देश दिए जाएं और वरिष्ठ अधिकारी को सजा दी जाए। महिला ने आरोप लगाया था कि वरिष्ठ अधिकारी ने 2011 में उसका यौन शोषण किया था।

शिकायत पर गठित की गई आइसीसी ने मामले की जांच की थी, इसमें वरिष्ठ अधिकारी ने आरोपों से इनकार किया था। कमेटी ने संदेह का लाभ देते हुए वरिष्ठ अधिकारी और महिला का दूसरे स्थान पर स्थानांतरण कर दिया था। पीठ ने कहा कि शिकायत पत्र में महिला ने कहा था कि घटना के समय कई कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन जांच के दौरान वह एक भी व्यक्ति का नाम नहीं दे पाई, जो उस दौरान मौजूद था। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने उन टिप्पणियों के बारे में भी नहीं बताया, जो वरिष्ठ अधिकारी ने उस पर की थीं। ऐसे में महिला द्वारा की गई पूरी शिकायत झूठी प्रतीत होती है।

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