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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए दान नहीं दिया तो स्कूल प्रशासन ने किया परेशान, प्रिंसिपल पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट, जानिए पूरा मामला

By Vinay Kumar TiwariEdited By:
Published: Sun, 31 Oct 2021 10:16 AM (IST)

हाई कोर्ट ने याचिका पर स्कूल व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब। याचिकाकर्ता हेमा बजाज ने याचिका ...और पढ़ें

पारिवारिक परिस्थितियों के कारण दान नहीं देने पर प्रधानाध्यापिका ने स्कूल प्रशासन पर लगाया परेशान करने का आरोप।
पारिवारिक परिस्थितियों के कारण दान नहीं देने पर प्रधानाध्यापिका ने स्कूल प्रशासन पर लगाया परेशान करने का आरोप।

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दान नहीं देने पर स्कूल प्रशासन द्वारा परेशान करने व निलंबित करने का आरोप लगाते हुए भलस्व स्थित राव मेहर चंद सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका पर न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव की पीठ ने स्कूल प्रशासन व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।

याचिकाकर्ता हेमा बजाज ने याचिका में कहा कि हर साल शिक्षकों को समरपैन खाते में चैरिटी के रूप में पांच हजार रुपये का योगदान करने को मजबूर किया जाता है। वहीं, इस बार समरपैन के नाम पर 15 हजार रुपये और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए दान स्वरूप 70 हजार रुपये दान करने को कहा गया। अधिवक्ता खगेश झा के माध्यम से दायर याचिका में उन्होंने कहा कि पति का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण उनकी वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। इसके कारण उन्होंने उक्त राशि देने से मना करते हुए पांच हजार रुपये दिए।

उनका आरोप है कि राम मंदिर निर्माण के लिए योगदान में छूट देने की उन्होंने स्कूल प्रशासन से अपील की, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उनके अनुरोध को खारिज करते हुए उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। यहां तक की अपने पद से इस्तीफा देने को कहा गया। उन्होंने इसकी शिकायत उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से की और उनके निर्देश पर शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ जांच शुरू की।उन्होंने शिक्षकों पर धमकी देने व उनके खिलाफ जातिवादी टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि शिक्षा विभाग की अनिवार्य मंजूरी के बिना ही उन्हें निलंबित भी कर दिया गया।

उन्होंने जबकि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम- 1973 की धारा 8 (4) के अनुसार निदेशक को सूचित किए बगैर प्रबंध समिति किसी कर्मचारी को निलंबित नहीं कर सकती है। उन्होंने उन पर लगे आरोपों को रद करने और स्कूल प्रबंधन को 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ-साथ उसके वेतन का लंबित बकाया राशि जारी करने का निर्देश देने की भी मांग की। इतना ही नहीं स्कूल प्रबंधन को अनुकंपा के आधार पर उनके निवास स्थान के पास संचालित स्कूल में स्थानांतरित करने का निर्देश देने की भी मांग की है।