नई दिल्ली (जेएनएन)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में गिरते भूजल स्तर को गंभीर समस्या बताया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और स्थानीय निकाय को फटकार लगाते हुए कहा कि इस मसले पर कोई गंभीर नहीं है। भूजल संरक्षण के लिए किसी ने कोई कदम नहीं उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने नीति आयोग की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया है, जिसमें कहा गया है कि विभिन्न प्राधिकरण केवल एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही हैं और अपनी जिम्मेदारियों से बच रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि आप पानी की खपत कम करने और भूजल संरक्षण के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। भूजल रिचार्ज करने के लिए यहां कोई योजना नहीं है।

पानी की गुणवत्ता में दयनीय है स्थिति

आज के समय में पूरे विश्व में पानी का संकट है और भारत भी इससे कोई अछुता नहीं है। भारत की स्थिति तो विश्व के पटल पर और भी दयनीय है। पानी की गुणवत्ता में 122 देशों की श्रेणी में भारत का स्थान 120वां है।

दिल्ली में 2020 तक समाप्त हो जाएगा भूजल

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान समय में भारत की लगभग 60 करोड़ आबादी पानी के संकट से जूझ रही है। रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष भारत में दो लाख लोग गंदे पानी के सेवन से मर जाते हैं। हैरानी और स्तब्ध करने वाली बात तो यह है कि जिस मानसून के समय जल की कमी नहीं होनी चाहीए उसी समय दुर्भागयवश रूप से देश जल संकट की समस्या से जुझ रहा हैI कहीं लोग पानी की समस्या को लेकर मटका फोड़ो आंदोलन कर रहे हैं तो कहीं पानी की समस्या को लेकर मारा-मारी है। देश के बड़े शहरों का तो और भी बुरा हाल है अगर बात भारत की राजधानी दिल्ली की करें तो अनुमान है कि दिल्ली का भूजल 2020 तक समाप्त हो जाएगा।

भारत में 61 फीसदी गिरा भूजल

दिल्ली में इस समय तक़रीबन 2.5 करोड़ लोग रहते हैं। पिछले दस वर्षों के आँकड़े अगर देखें तो पूरे भारत में 61 प्रतिशत भूजल में कमी आई है, जबकि 2011 में पूरे विश्व का 25 प्रतिशत भूजल हमारे पास था।

दिल्ली को यमुना से मिलता है 60 फीसदी पानी

दिल्ली में आँकड़ों की बानगी अगर देखी जाए तो यहाँ 600 मिलीयन क्यूबिक मीटर पानी वर्षा से हर साल मिलता है। वर्तमान समय में दिल्ली में भूजल की उपलब्धता 290 मिलीयन क्यूबिक मीटर है। वहीं सप्लाई वॉटर का 60 प्रतिशत पानी यमुना से आता है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार दिल्ली को 3,859 मिलियन लीटर पानी हर दिन की ज़रूरत है।

इन इलाकों में है पानी की किल्लत

प्रभावित इलाकों की बात की जाए तो डियर पार्क, किशनगंज, महरौली, ग्रीन पार्क, मुनीरका, मालवीय नगर, चितरंजन पार्क, ए-2 ब्लॉक जनकपुरी, सुल्तानपुर, पूठ खुर्द, माजरा डबास, चंदनपुर, बुराड़ी, गीता कॉलोनी, लक्ष्मी नगर, रमेश पार्क, एनडीएमसी क्षेत्र, दिल्ली कैंट, पटेल नगर, पहाडग़ंज, वजीराबाद, राजेंद्र नगर, झंडेवालान, कनॉट प्लेस, करोल बाग,  चांदनी चौक, दिल्ली गेट, दरियागंज, सिविल लाइन के अलावा भी और कई सारे इलाके पानी की किल्लत से प्रभावित हैं।

40 फीसदी पानी लीकेज व चोरी से बर्बाद होता है

वहीं सीएसई (सेटर फॉर साईंस एंड इनवायरन्मेंट) की रिसर्च के मुताबिक दिल्ली में 3,800 मिलीयन क्यूबिक मीटर की सप्लाई होती है जो कि माँग से कम है जिसमें से 52 प्रतिशत  ट्रांसमिशन के दौरान बर्बाद हो जाता हैI यही नहीं रिसर्च के अनुसार, दिल्ली में केवल 75 फीसदी पानी के सप्लाई का नेटवर्क है। 35 से 40 प्रतिशत पानी पुरानी पाइपलाइन में लीकेज और चोरी की वजह से बर्बाद होता है। सिंगापुर, चीन, अमेरिका जैसे देशों में यह अनुपात 15-20 प्रतिशत है। 1 अप्रैल 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 2.65 लाख पानी के कनेक्शन बिना मीटर के लगे हुएं हैं और 4 लाख कनेक्शन वाले मीटर या तो काम नहीं कर रहें हैं या खराब है।

सरकार के साथ आम लोग भी हैं जिम्मेदार

जल की समस्या या जल संकट पैदा होने के लिए न केवल सरकार ज़ि़म्मेदार है बल्कि इस समस्या को पैदा करने में हम भी बराबर के भागीदार हैं। दिल्ली में ही रसूखदार लोगों की बात की जाए तो वह एक दिन में 600 लिटर से भी ज़्यादा पानी का इस्तेमाल कर लेते हैं। साथ ही यहाँ रहने वाले निवासी प्राकृतिक संसाधन का सदुपयोग भी नहीं कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार की जल संरक्षण योजना जिसके तहत दिल्ली में रहने वाले लोगों (जिनका घर 500 स्क्वायर मीटर या इससे ज़्यादा है) को जल संरक्षण तंत्र लगाना था। लेकिन इस पर भी लोगों ने सजग और सक्रिय हो कर काम नहीं किया वैसे यहाँ गलती सरकार की भी है क्योंकि इसे लागू करवाने में उसने भी कोई सख्ती नहीं दिखाई।

Edited By: Amit Kumar Singh